मैं वेतन पूरा बचाता हूं, बस ऊपर का ही खाता हूं
मेरी कलम से…
अखिलानन्द यादव
मैं वेतन पूरा बचाता हूं
बस ऊपर का ही खाता हूं।
ना वफादार मैं साथी हूं,
ना समझदार की भांति हूं ।
ना पहरेदार हूं सोने का
ना थानेदार किसी थाने का ।।
बस डंडा यूं ही घुमाता हूं
मैं वेतन पूरा बचाता हूं,
बस ऊपर का ही खाता हूं।
ना डॉक्टर मैं सरकारी हूं ,
ना दवा का ही व्यापारी हूं।
ना जीवन मौत का रेखा हूं,
ना समय किसी को देता हूं।।
कुछ भी मैं कलम चलाता हूं
मै वेतन पूरा बचाता हूं,
बस ऊपर का ही खाता हूं ।
सरपंच नहीं किसी गांव का,
मोहताज नहीं कोई छांव का ।
आकाश भी मुझसे दूर नहीं,
विकास को मैं मजबूर नहीं ।।
हर जगह जगह पहुंचाता हूं
मै वेतन पूरा बचाता हूं,
बस ऊपर का ही खाता हूं ।
ना अध्यापक विद्यालय का,
ना सोच बना शौचालय का।
बच्चे बाहर ही जाते हैं ,
जो आते हैं बस आते हैं ।।
सिस्टम में समय बिताता हूं
मै वेतन पूरा बचाता हूं,।
बस ऊपर का ही खाता हूं ।
ना विधायक हूं किसी क्षेत्र का,
ना सांसद हूं किसी गोत्र का ।
ना जनता का मैं बेटा हूं,
ना हर बिस्तर पर लेटा हूं ।।
फिर भी सबको मैं भाता हूं
मै वेतन पूरा बचाता हूं,
बस ऊपर का ही खाता हूं।
संबंध नहीं अभिनेता से,
ना नजदीकी किसी नेता से।
“अखिल”भाव से लिखता हूं,
मैं हर पन्ने में दिखता हूं
बस “आनंद ” गीत सुनाता हूं
मै वेतन पूरा बचाता हूं,
बस ऊपर का ही खाता हूं।।
✍️अखिलानंद यादव मऊ में पत्रकार हैैं और उनका लेेेेखन शैैैली पर काफी पकड़ है।
उनका मो. नं. 9450461087 है।

