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बेमिसाल इंसान : 52 साल के घासीराम ने पीसीएस बन बढ़ाया मऊ का मान

(मुहम्मद अशरफ)
मऊ। असफलता की चिंता मत करो वे बिल्कुल स्वाभाविक है, वे असफलताएं जीवन सौंदर्य हैं उनके बिना जीवन क्या होता है। जीवन यदि संघर्ष न रहे तो जीवित रहना ही व्यर्थ है। उक्त पक्तियां मऊ नगर निवासी घासी राम पर बिल्कुल सत्यार्थ व चरितार्थ कर रही है।
आपको बताते चले कि उत्तर प्रदेश के मऊ जनपद के रहने वाले 52 साल के दिव्यांग घासीराम ने पीसीएस की परीक्षा पास कर न सिर्फ इतिहास रचा है बल्कि यह संदेश दिया है कि उम्मीद और मंजिल के लिए उम्र का कोई पड़ाव नहीं होता।  उनका चयन जिला लेखा परीक्षा अधिकारी के पद पर हुआ है। यह खबर जैसे ही परिवारों, दोस्तो को हुई तो वह खुशी से झूम उठे और बधाई देने वालों का तांता लग गया।
इसी संघर्ष में जीवन का काव्य, संघर्ष और त्रुटियों की परवाह मत करों और असफलताओं पर ध्यान मत दो यह छोटी-छोटी फिसलने हैं, आदर्श को सम्मान रख कर हजार बार आगे बढ़ने का प्रयत्न करो। यदि तुम हजार बार सफल हो तो एक बार फिर प्रयत्न करो। विश्व की समस्त शक्तियां हमारी है हमने अपने हाथ अपनी आंखों पर लिए और चिल्लाते हैं कि सब ओर अंधेरा है। जान लो कि हमारे चारों ओर अंधेरा नहीं है अपने हाथ अलग करो तुम्हें प्रकाश दिखाई देने लगेगा जो पहले भी था अंधेरा कभी नहीं था, हम सब मूर्ख हैं जो चढ़ाते हैं कि हम कमजोर हैं कमजोरों का इलाज कमजोरी की बिना नहीं कर सकती का विचार करना है मनुष्य को सत्य की शिक्षा दो जो पहले से ही उनमें है घासीराम पुत्र स्व. अखदास दक्षिणटोला थाना क्षेत्र के दबगरपुरा के मूलनिवासी है। उनकी शैक्षिक योग्यता हाईस्कूल द्वितीय श्रेणी 1983 में, इंटरमीडिएट 1986 में, वाणिज्य डीएवी इंटर कालेज मऊ, स्नातक 1990 व स्नातकोत्तर 1992 तथा विधिस्नातक शिब्ली नेशनल कालेज जनपद आजमगढ़ से किया है। 
उनका कहना है कि, समुद्र की लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती, कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती, कुछ किए बिना ही, जय जयकार नहीं होती। 
एक तरफ परिवार का गम तो वहीं खुशी भी… 
बताते चले कि घासीराम की शादी होने कुछ सालों बाद किन्ही कारणों से पत्नी बच्चों सहित इनका साथ छोड़कर चले गये। घर से गये लगभग 22 साल हो गये और अब तक घर वापस नहीं आये, बीबी बच्चो के जाने के बाद घासीराम ने हार नहीं मानी और लगातार अपने जीवन में संघर्ष करते रहे जो आज आपके सामने है। उन्होंने परिवार का दर्द छुपाकर पीसीएस की तैयारी में जुट गये थे और आज जिला लेखा परीक्षा अधिकारी के पद चयन होकर यह साबित कर दिया कुछ भी मुमकिन नहीं है। उन्होंने अपनी इस कड़ी सफलता से जनपद का नाम रोशन किया है। घासीराम की पत्नी सुनीता देवी जो आजमगढ़ में पुलिस विभाग में नौकरी करती है और उनकी तीन प़ुत्रियां प्रियंका 25 वर्ष, दीक्षा 23 वर्ष, आकांक्षा 21 व एक बेटा भारत भूषण भी है। कहा कि आज मैं जो इस मुकाम पर हैं इसका सारा योगदान हमारे दोस्तों व बहन पर जाता है। अगर ये लोग साथ नहीं देते तो यह सफलता हाथ नहीं लगता है।
उन्होंने बताया कि मैं गरीब  परिवार से विलांग करता हूं और एक कान से दिव्यांग भी हैं, कहा कि मुझे बचपन से ही अधिकारी बनने का शौक था जो आज सच साबित हो गया। 52 साल की उम्र में पीसीएस की परीक्षा पास कर घासी राम फूले ही नही समा रहे थे। उनकी रुचि बचपन से ही किताबे पढ़ना और फिल्में देखने को शौक था।

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