लाकॅ डाउन का उल्लंघन करना डा. यूपी सिंह को पड़ा महंगा, अधिकारियों ने लिया क्लास
मऊ। लॉक डाउन के मद्देनज़र प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद है, लॉकडाउन का पालन बेहद कड़ाई से करवाया जा रहा है।जनपद में सभी हॉस्पिटल्स के ओपीडी बंद पड़े है, केवल इमरजेंसी सेवाएं ही प्रदान की जा रही हैं। मेडिकल स्टोर्स पर सोशल डिस्टन्सिंग का पालन करवाया जा रहा है। ऐसे में सोशल डिस्टन्सिंग की धज्जियां उड़ाते हुए सैकड़ो की भीड़, सेल्स रोड पर स्थित आर बी मेमोरियल क्लिनिक है, जिसे जनपद के वरिष्ठ चिकित्सक डॉक्टर यूपी सिंह चलाते हैं। इस गैर जिम्मेदाराना हरकत की खबर जब सिटी मजिस्ट्रेट व अपर पुलिस अधीक्षक शैलेन्द्र कुमार श्रीवास्तव को हुई तो वह अपने दल बल सहित क्लिनिक पर पहुंचे। कोरोना से भयाक्रांत माहौल में सोशल डिस्टन्सिंग की ऐसी धज्जियाँ उड़ते देख सिटी मजिस्ट्रेट व एएसपी दोनों ही बिफर पड़े। फिर क्या था डॉक्टर साहब की जम कर क्लास ली गई। तत्पश्चात एएसपी ने क्लिनिक संचालक को यह निर्देश दिए कि जो भी मरीज वहां आज उपस्थित हुए हैं उनको देखा जाये परन्तु कल से वहां देखे जाने वाले मरीजों को नियंत्रित किया जाये ताकि भीड़ इक्कट्ठा न हो। लॉकडाउन के उन्लंघन करने कि सजा के तौर पर कप्तान ने बड़ी ही दिलचस्प युक्ति अपनाई। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार मरीज धूप में सुबह से खड़े अपने नंबर का इंतज़ार कर रहे हैं, ठीक उसी प्रकार क्लिनिक के एसी और पंखो के निचे बैठे स्टाफ को भी उन मरीजों के कष्ट का एहसास होना चाहिए। उन्होंने क्लिनिक के एक स्टाफ को गेट के बहार कुर्सी टेबल लगवा कर धूप में बैठा दिया। पुलिस के 6 जवानो को वहां सोशल डिस्टन्सिंग का सही से पालन हो, इस हेतु खड़ा कर दिया। दरअसल, प्राइवेट क्लिनिक वालो को लगता है कि मरीज मजबूर है। वो किसी भी हालात में डॉक्टर साहब से अपना मर्ज़ दिखायेगा इसीलिए डॉक्टर साहब से ज्यादा भाव वे कर्मी बनाने लगते हैं, जो जान बूझ कर अपना हवा टाइट रखने के लिए मरीजों को बेवजह परेशान करते हैं। कहते हैं जो दिखता है वो बिकता है। अस्पतालों में ये भीड़ जुटाई जाती है ताकि दूर दराज़ से आये मरीजों को लगे कि हाँ भाई अब सही जगह आये हैं, यहाँ भीड़ ज्यादा है मतलब कि डॉक्टर बड़े काम का है। डॉक्टर तो सदैव काम के ही होते हैं पर धंधा भी तो करना है और कम्पटीशन भी है, भीड़ तो जुटाना ही पड़ेगा। अब सभी डॉक्टर टी के लाहिड़ी तो बन नहीं सकते।


