पेंशन से अखबार चलाने वाले सम्पादक त्रिभुवन उपाध्याय का निधन, पत्रकारों में शोक की लहर
(रिपोर्टर शशिराज सिन्हा, राजेश गुप्ता)
जौनपुर। रेल विभाग से सेवा निवृत्त एवं प्रतिष्ठित हिन्दी साप्ताहिक समाचार पत्र के सम्पादक एवं बक्शा विकास खण्ड के बीरभानपुर मलिकानपुर गांव निवासी 65 वर्षीय त्रिभुवन उपाध्याय का मंगलवार को लम्बी बीमारी के बाद निधन हो गया।
निःसंतान श्री उपाध्याय अपने भाई के बच्चों को अपना मानते हुए शादी विवाह भी पिता से बढ़कर करते रहे। शूगर एवं अन्य कई बीमारियों में ग्रसित होने पर श्री उपाध्याय विगत कई दिनों तक पालिटेकिनक चैराहे के निकट इलाहाबाद रोड पर स्थित साई चिकित्सालय में भर्ती रहे। गंभीर हालत में उन्हे बेहतर इलाज के लिए वाराणसी ले जाया जा रहा था कि कि रास्ते में उनकी जीवन डोर टूट गयी।
पत्रकारिता के मापदण्डों का पूरी तरह पालन करने वाले श्री उपाध्याय स्वाभिमानी पत्रकार थे। वे कभी विज्ञापन तथा अन्य किसी काम के लिए न तो अधिकारियों के पास गये न ही नेताओंकी गणेश परिक्रमा किये। अपने पेशन की धनराशि से समाचार पत्र का नियम से संचालन करने वाले उपाध्याय की अपनी एक अलग पहचान रही है। वे मुख्यालय कम आते थे और अपने दवा आदि की व्यवस्था कर एवं सूचना विभाग आकर शुभ चिन्तकों से मिलकर और लोगों को जबरन चाय पिलाकर एक दो घण्टे में वापस चले जाते थे।
स्पष्टवादी और सभी से वास्ता सरोकार रखने वाले ऐसे विरले पत्रकार के निधन की खबर सुनते ही पत्रकारों में शोक की लहर छा गयी । अनेक पत्रकारों ने उन्हे अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि दिया। मीडिया सेण्टर रूहट्टा पर हुई एक शोक सभा में उन्हे पत्रकारिता की गरिमा बनाये रखने वाला पत्रकार बताते हुए उन्हे श्रद्धासुमन अर्पित किया गया। पत्रकार भवन में बैठक कर तमाम पत्रकारों ने उन्हे श्रद्धांजलि दिया और उनकी कमी को अपूरणीय क्षति बताया।

