चर्चा मेंदुनिया 24X7

गृहप्रवेश में पत्नी की मोम की मूर्ति लगाकर श्रीनिवास ने प्रेम को किया जीवन्त

(आनन्द कुमार)

पति पत्नी के रिश्ते में प्यार और झगड़ने के किस्से तो आपने बहुत से सुने होंगे। अदालत से लेकर थाने तक पति-पत्नी के अदावत भी देखे होंगे। यह रिश्ते वास्तव में जितने अनमोल होते हैं उतना अनमोल कोई रिश्ता नहीं होता। बस इस रिश्ते की महानता को समझना है। रिश्ते की अहमियत को समझना है। अगर पति पत्नी के रिश्ते में धोखा, फरेब व झूठ ना हो तो यह रिश्ता टूट ही नहीं सकता और इस रिश्ते से पवित्र कोई रिश्ता नहीं हो सकता। क्योंकि यह एक ऐसा रिश्ता है, जिससे ना सिर्फ दो गैर अपने होते हैं बल्कि ऐसे अपने होते हैं कि जैसे लगता है कि वह कभी गैर थे ही नहीं।
ऐसे में जब सात जन्मों के कसमें खाकर, सात फेरों की रस्म अदायगी की गई हो और जीवन खट्टी मीठी, नोकझोंक के साथ एक लंबे पड़ाव तक बीता हो, ऐसे में जब पति पत्नी में से कोई एक का साथ छूट जाए तो दूसरे पर क्या बीतेगी इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। ऐसा ही हुआ कर्नाटक के कोप्पल में।
कर्नाटक राज्य के कोप्पल निवासी उधोगपति श्रीनिवास गुप्ता ने अपने घर गृहप्रवेश के दिन, अपने घर में अपनी पत्नी माधवी गुप्ता का हुबहू मूर्ति बनाकर, ऐसे विराजमान कराया था जैसे लगता था की पत्नी वहीं बैठी हुई है अभी बोल पड़ेगी।श्रीनिवास ने पत्नी की मूर्ती बनवाकर अपने एहसास को जीवन्त करने की जो कोशिश की वास्तव में अलग, अनोखा, अप्रतीम सौन्दर्य से भरा है।

गृह प्रवेश के दिन जब मेहमान, मित्र, रिश्तेदार श्रीनिवास गुप्ता के घर पार्टी में प्रवेश करने के लिए जैसे ही दहलीज पर कदम रखे तो सामने बैठे सोफे पर श्रीनिवास की पत्नी माधवी देवी को देख लोग हक्का-बक्का हो गए। पहले तो लोग समझ ही नहीं पाए कि उनकी धर्मपत्नी, जो परलोक सिधार गई वह ऐसे कैसे सोफे पर विराजमान हो सकती हैं। क्योंकि सभी को पता था कि उनकी पत्नी का एक्सीडेंट में मृत्यु हो गया है, लेकिन श्रीनिवास के प्रेम का यह अलग अंदाज देखकर लोगों ने दांतों तले उंगली दबा ली। मोम की बनी मूरत के साथ लोगों ने फोटो खिंचवाई, सेल्फी ली और इस पार्टी की चर्चा पूरे देश में चर्चे आम हो गई।

दरअसल 3 साल पहले उनकी पत्नी का एक एक्सीडेंट में मौत हो गया था और गृह प्रवेश में पत्नी की कमी महसूस ना हो इसलिए श्रीनिवास ने आखों के सपने और मन व दिल के प्रेम को आंगन में उकेरने की जो नायाब कोशिश की है वह अपने आप में प्रेम का एक अटूट कला है। ऐसे में कहा जा सकता है, भगवान को जो मंजूर होता उसमें तो किसी की नहीं चलती लेकिन व्यक्ति अपनों के लिए जो कर सकता है, वह तो करता ही है। श्रीनिवास ने अपना घर बनवाया था उसमें पत्नी के चरण पड़े, लेकिन दुर्भाग्य बस पत्नी ने साथ छोड़ा तो श्रीनिवास पत्नी के प्रेम को जीवन्त करने की अनोखी कोशिश कर डाली।
आज भले ही दुनिया पति पत्नी के रिश्ते में तरह-तरह की चर्चा करें लेकिन श्रीनिवास एवं उनके पत्नी के प्रेम के चर्चे हर जुबान पर होनी चाहिए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *