गर्भवती की गोदभराई, कुपोषित-अतिकुपोषित बच्चों का चिन्हांकन
मऊ । बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग की गतिविधियों के तहत जिले के परदहा ब्लाक के अंतर्गत बकवल,बहरीपुर गांव के आंगनबाड़ी केन्द्रों पर गाँव की गर्भवती महिलाओं की गोदभराई के साथ ही ग्राम स्वास्थ्य एवं पोषण दिवस (वीएचएनडी) के तहत कुपोषित व अति कुपोषित बच्चों के चिन्हांकन कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
मुख्य सेविका बेबी परवीन ने बताया कि गोदभराई कार्यक्रम में 7 माह से ऊपर की गर्भवती महिलाओं को प्रतीक स्वरूप नारियल, चना, गुड़, सत्तू, मौसमी फल, दवाएं एवं अन्य सामाग्री गर्भवती के आँचल में उपहार के रूप में प्रदान की जाती है। इस कार्यक्रम में मातृ समिति के सदस्य शामिल हुए और अति कुपोषित व कुपोषित बच्चों के लिए पोषण व स्वास्थ्य संबंधी जानकारी तथा महिलाओं व बालिकाओं को एनीमिया का इलाज व् बचाने के उपाय बताये। इसके अलावा बच्चों की माताओं को बच्चों के समग्र विकास हेतु आवश्यक देखभाल तथा खानपान संबंधी जानकारी दी गयी। इसके साथ ही बच्चों को मेन्यू के हिसाब से हरी सब्जी, दाल, दलिया आदि खाद्य पदार्थ ठोस आहार के रूप में देने के लिये बताया गया।
बाल विकास परियोजना अधिकारी (सीडीपीओ) दिनेश राजपूत ने बताया कि परदहा ब्लाक के सभी आंगनबाडी केन्द्रों पर गोदभराई के साथ वीएचएनडी का आयोजन हुआ। शासन द्वारा इनकार्यक्रमों का उद्देश्य गर्भवती महिलाओं और बच्चों के विकास मे वृद्धि करने हेतु प्रभावी कार्यरूप एवं विभिन्न माध्यमों से शिशु के साधारण स्वास्थ्य एवं पोषण आवश्यकताओं की देखभाल के लिए जागरूकता द्वारा माँ की योग्यता मे वृद्धि करना है। इसके साथ ही कुपोषण एवं गर्भवती महिलाओं एवं शिशुओं के लिये सहायक पुष्टाहार की व्यवस्था सुनिश्चित करना है।
जिला कार्यक्रम अधिकारी (डीपीओ) के.एन. पाण्डेय ने बताया कि जिलाधिकारी ज्ञान प्रकाश त्रिपाठी की अध्यक्षता में पोषण अभियान के तहत जिला पोषण समिति जिला कन्वर्जेंसशन समिति की बैठक हुई जिसमें डीएम ने सभी अधिकारियों को सख्त निर्देश दिया है कि कुपोषित बच्चों को पुष्टाहार देकर कुपोषण मुक्त बनाएं, साथ ही गर्भवती महिलाओं के खान-पान पर विशेष ध्यान दिया जाये तथा बच्चा पैदा होने पर उसका वजन करा कर देखा जाए कि बच्चा स्वस्थ है कि नहीं यदि स्वस्थ नहीं है तो नये महिला अस्पताल के एनआईसीयू में भर्ती कराएं जहां उनका पूरा निःशुल्क इलाज होगा। गर्भवती महिलाओं को हरी साग सब्जियां अधिक मात्रा में खाने के लिए प्रेरित किया जाए। आंगनबाड़ी एवं आशा कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया कि गर्भवती महिलाओं को उनसे संबंधित सभी प्रकार की जानकारियां समय- समय पर देती रहें जिससे कि गर्भवती महिला एक स्वस्थ संतान को जन्म दे सके।

