ओआरएस के पैकेट और जिंक की गोली बाँट रहीं आशा कार्यकर्ता, इस्तेमाल का तरीका भी बता रही
■ सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़ा, घर-घर पहुंच रही टीम
मऊ। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत जिले में 9 जून तक चलने वाले सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़ा के तहत रानीपुर ब्लॉक में स्वास्थ्य विभाग की टीम घर-घर भ्रमण कर रही है। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बच्चों को डायरिया से बचाना है ताकि जिले में शिशु एवं बाल मृत्यु दर में कमी लायी जा सके। इस पखवाड़े के अंतर्गत समस्त ऐसे परिवार को लक्षित किया जा रहा है जिसमें 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चे हों और दस्त रोग से ग्रसित हों। इसके साथ ही इस उम्र के कुपोषित बच्चों वाले परिवार को भी चिन्हित करने पर ज़ोर दिया जा रहा है। 
ब्लॉक कम्यूनिटी प्रोसेस मैनेजर (बीसीपीएम) हूमेरा ख़ातून ने बताया कि रानीपुर ब्लॉक के अंतर्गत गांवों में यह पखवाड़ा संचालित किया जा रहा है जिसमें गठित स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ आशा संगिनी गृह भ्रमण कर बच्चों को चिन्हित कर रही हैं । चिन्हित परिवारों को ओआरएस के पैकेट के साथ जिंक की गोली दी जा रही हैं। इसके साथ ही हाथ धोने, स्वच्छता, अपने आसपास साफ़-सफ़ाई रखने, स्वच्छ पानी का इस्तेमाल करने जैसी जानकारी भी दी जा रही हैं। उन्होने बताया कि खुरहट, पालिगढ़, सरसेना, मिर्जापुर, चिरैयाकोट आदि गावों के क्षेत्रों में खानाबदोश, अति संवेदनशील क्षेत्र, निर्माण कार्य में लगे मजदूरों के परिवार ईंट-भट्ठे आदि में रहने वाले परिवार के साथ ही मलिन बस्तियों में निवास करने वाली आबादी को इस पखवाड़े में प्राथमिकता के तौर पर रखकर टीम कार्य कर रही है।
दस्त नियत्रण पखवाड़ा के नोडल अधिकारी एवं एसीएमओ डॉ पीके राय ने बताया कि यह पखवाड़ा 9 जून तक जारी रहेगा। यदि किसी बच्चे को डायरिया “दस्त” हो तो उस दौरान ओआरएस एवं तरल पदार्थ दिया जाना चाहिए। दस्त के दौरान जिंक की गोली का उपयोग अवश्य किया जाए, 2 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों को उनकी उम्र के अनुसार कुल 14 दिनों तक इसे देना चाहिए। 2 से 6 माह तक के बच्चों को आधी गोली, 6 माह से 5 वर्ष तक के बच्चे को एक गोली जिंक का देना चाहिए। उन्होने बताया कि यदि बच्चे को पानी जैसा लगातार मल हो, बार-बार उल्टी हो, अत्यधिक प्यास लगे, पानी न पी पाये, बुखार हो और मल में खून आ रहा हो तो उसे तत्काल स्वास्थ्य केंद्र पर ले जाना चाहिए। जनपद के सभी सरकारी चिकित्सा इकाइयों पीएचसी व सीएचसी केंद्र पर निःशुल्क इलाज उपलब्ध है।
जिंक और ओआरएस के उपयोग के बाद भी यदि डायरिया से पीड़ित बच्चा ठीक न हो तो उसे नजदीक के स्वास्थ्य केंद्र पर अवश्य ले जाएं। बीमारी के दौरान बच्चे को उसकी आयु के अनुसार स्तनपान एवं ऊपरी आहार तथा भोजन अवश्य देते रहें। बच्चे को पीने हेतु स्वच्छ पानी ही दिया जाए, खाना बनाने से पूर्व व बच्चे का मल साफ करने के पश्चात महिलाओं को साबुन से अपना हाथ अवश्य धो लेना चाहिए, डायरिया को फैलने से रोकने के लिए शौंचालय का प्रयोग अवश्य करना चाहिए।
डिस्ट्रिक्ट कम्यूनिटी प्रोसेस मैनेजर (डीसीपीएम) संतोष सिंह ने बताया कि जनपद में ख़ास कर ग्रामीण इलाकों में आशा कार्यकर्ताओं को निर्देशित किया गया है कि वे अपने कार्यक्षेत्र के अंतर्गत गांव में 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चे वाले समस्त घरों में भ्रमण करें एवं परिवार को परामर्श देने के साथ ही ओआरएस का एक पैकेट प्रति बच्चे के अनुसार प्रदान करें। गृह भ्रमण के दौरान आशा द्वारा ओआरएस का घोल बनाने की विधि भी माताओं को सिखायी जा रही हैं ताकि बच्चे के परिजनों को ओआरएस का घोल बनाने के सही तरीकों की जानकारी हो सके।

