स्तनपान से बढ़ती है रोग प्रतिरोधक क्षमता

मऊ। नवजात के लिए स्तनपान सर्वोत्तम आहार है। मां का दूध नवजात के लिए व्यापक मानसिक विकास के साथ-साथ उनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास भी करता है। वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुये कोरोना के साथ-साथ डायरिया, निमोनिया, कुपोषण एवं अन्य संक्रमित बीमारियों से लड़ने में पूरी तरह सहायक है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ सतीशचन्द्र सिंह ने बताया कि बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता के साथ सर्वांगीण शारीरिक विकास के लिए जन्म के पहले घंटे के अंदर माँ का पहला गाढ़ा पीला दूध नवजात के लिए बेहद आवश्यक है और यह अमृत के समान होता है। शिशु एवं बाल जीविता पर इसका अहम प्रभाव पड़ता है, जिन शिशुओं को एक घंटे के अंदर स्तनपान नहीं कराया जाता है, उनमें मृत्यु दर की संभावना 33% अधिक होती है, जन्म से छह माह तक शिशु को केवल स्तनपान कराने पर बाल्यकाल रोग जैसे दस्त एवं निमोनिया के खतरे में 11% से 15% की कमी लाई जा सकती है।
डॉ सिंह ने बताया कि अगर धात्री कोरोना उपचाराधीन है तो भी बच्चे को विशेषज्ञ चिकित्सक की सलाह विशेष उपायों के साथ स्तनपान करा सकती हैं, इसके लिये सर्वप्रथम धात्री को साफ कपड़े पहनना, मास्क लगाना, अपने हाथों और वक्ष सतह को अच्छी तरह से धोना फिर खुली हवा के प्रसार के जगह पर बैठ कर बच्चे को स्तनपान करा सकती हैं।
जिला महिला अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ प्रवीण सिंह ने बताया कि नवजात शिशु के लिए पहले ही घंटे के अंदर पीला गाढ़ा जो कोलेस्ट्रम संपूर्ण आहार होता है, आवश्यक रूप से पिलाना चाहिए। यह पहला स्तनपान शिशु के शरीर में रोगों से लड़ने की क्षमता का विकास करता है। इस महामारी काल में तो यह और भी आवश्यक है। जन्म के पहले घंटे में शिशु को शहद, पानी या कोई अन्य तरल पदार्थ का सेवन बिल्कुल नहीं कराना चाहिये। नवजात को छह माह तक सिर्फ माँ का दूध ही पिलाना चाहिए। छह माह से दो वर्ष अथवा उससे अधिक समय तक स्तनपान कराने के साथ-साथ अनुपूरक आहार भी देना चाहिए। किसी भी समस्या के लिए विशेषज्ञ डाक्टर की सलाह अवश्य लें जो जिला महिला अस्पाताल में निःशुल्क उपलब्ध है।

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