सात लाख किशोर-किशोरियों को खिलाई गई कृमि मुक्ति की निःशुल्क दवा
मऊ। कोविड-19 महामारी काल में किशोर-किशोरी स्वास्थ्य को लेकर केंद्र और प्रदेश सरकार सचेत है साथ ही जिला स्वास्थ्य निगरानी समिति के अध्यक्ष व जिलाधिकारी अमित सिंह बंशल भी संचालित समस्त स्वास्थ्य कार्यक्रमों पर निगरानी रखे हुये हैं । जिलाधिकारी ने समीक्षा बैठक दौरान, कोविड-19 महामारी काल में 28 सितंबर से 07 अक्टूबर तक चलाये गये राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस (एनडीडी) कार्यक्रम का जानकारी लिया।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ सतीशचन्द्र सिंह ने बताया कि राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस (नेशनल डीवोर्मिंग डे) अभियान शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में फ्रंट लाइन वर्करों 4,554 आशा एवं आगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से चलाया गया। जिले में एक से 19 वर्ष तक के आयु के सभी बच्चों को कृमि संक्रमण से बचाने के लिये 7.05 लाख किशोर किशोरियों को पेट के कीड़े निकालने की दवा खिलाई गई।
सीएमओ ने आगे बताया कि परजीवी कृमि संक्रमण को नेमाटोड संक्रमण भी कहते हैं। यह संक्रमण हैलिमिंथियासिस जैसा संक्रमण होता है, जो नेमाटोड फायलम के जीवों द्वारा होता है। नीमाटोड परजीवी होते हैं। परजीवी (पैरासाइट्स) वह कीटाणु है जो व्यक्ति में प्रवेश करके बाहर या भीतर (ऊतकों या इंद्रियों से) जुड़ जाती है और सारे पोषक तत्व को चूस लेती है। किशोर-किशोरी या कोई भी स्वस्थ व्यक्ति भी कमजोर हो जाता है, चाहे वह कितना भी पोषक आहार क्यों न सेवन करता हो, वैसे भी एक स्वस्थ मनुष्य को वर्ष में दो बार कृमि निकालने की दवा का अवश्य सेवन करना चाहिये जो कि सरकार द्वारा पूरी तरह से निशुल्क है।
सीएमओ ने बताया कि कृमि संक्रमण के लक्षणों में शरीर का पीला होना, बुखार, पेट में दर्द, दिल तेजी से धड़कना, चक्कर आना, खाने का अच्छा न लगना और बार-बार दस्त होना कृमि के लक्षण हो सकते हैं। पेट के कीड़े शरीर में हमला करते हैं तो बीमारी बढ़ जाती है।
जिला सामुदायिक प्रक्रिया मैनेजर (डीसीपीएम) संतोष कुमार सिंह ने बताया कि जून 2018 में विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा आकड़ों के अनुसार पूरे विश्व में 1.3 अरब लोग कृमि रोग से पीड़ित हैं जिसमें केवल भारत में 1 से 14 वर्ष के 241 मिलियन बच्चों में इसका संक्रमण है। कृमि रोग से बचाव के लिए भारत सरकार द्वारा प्रत्येक वर्ष दो बार दवा खिलाने का कार्यक्रम चलाया जाता है इसी क्रम में 28 सितम्बर से 07 अक्टूबर को राष्ट्रीय कृमि मुक्ति सप्ताह चलाया गया।

