मोख्तार अंसारी के राजनीतिक पकड़ और चुनाव लड़ने के तौर तरीको के आगे-पीछे सभी विपक्षी व सियासतदार बौने साबित हुए

■ विधायक होने का पांच बार से इतिहास बनाने वाले आखिर इस सरकार को यह हो क्या गया ?

(आनन्द कुमार)

मऊ। जो खुद सरकार था, जिसके एक बोल पर कई जनपदों के प्रशासन से लेकर सरकारी अमला नतमस्तक होता था। जिसके एक इशारे पर प्रदेश के कई बड़े संस्थानों में हवा का रुख बदल जाती थी। जिसकी तूती न सिर्फ उत्तर प्रदेश में बोलती थी बल्कि जिसके खौफ का कनेक्शन दिल्ली, पंजाब, उतराखंड, बिहार, हरियाणा व पंजाब वाया यूपी में इस कदर था कि लोग उसके आगे नतमस्तक होते थे कि जैसे लगता था कि वही सरकार है। लेकिन ये क्या यह सरकार इतना असरकार कैसे हो सकता है, यह बात समझ से परे है।
कभी बसपा, कभी सपा कभी छोटे दल के सहारे निर्दल, विधायक होने का पांच बार से इतिहास बनाने वाले आखिर इस सरकार को यह हो क्या गया ?
क्या सरकार खौफज़दा हैं ? वर्तमान की योगी सरकार से या सरकार वास्तव में बीमार है ? मामला जो भी हो लेकिन बात तो कुछ ना कुछ है।
छात्र नेता से, बदमाश, बदमाश से माफिया और माफिया से सीधे विधायक बने मोख्तार अंसारी की हनक में आखिर खलल डाल कौन रहा है ?

जिसके नाम पर हजारों लोग जीते हैं, जिसके मुट्ठी में कई विधानसभा और लोकसभा सीटों का तापमान चढ़ता और उतरता है। क्या वह सरकार इस समय वास्तव में लाचार और बेवस है या शासन के खौफ ने उसे इस तरह की लाचारगी दिखाने को मजबूर कर दिया है। सच क्या है, झूठ क्या है, यह तो वह सरकार ही जाने। लेकिन उस सरकार की हैसियत कम होते ही वर्तमान सरकार की जो कार्यप्रणाली हैं उससे तो यही प्रतीत होता है कि कहीं न कहीं वह ऐसे एकला सरकार चलाने वालों के प्रति अपनी भृकुटी को ताने बैठी है जिसका मूल्यांकन लगा पाना जो खुद सरकार था उसके लिए असहज है।

मोख्तार अंसारी व्हीलचेयर पर आसीन होकर पंजाब से यूपी के लिए चाक चौबंद सुरक्षा व्यवस्था में चले और बांदा जेल पंहुच गये। सोशल मीडिया पर मोख्तार को लेकर लोग तरह-तरह की बाते लिखकर अपनी-अपनी पीठ थपथपा रहें हैं तो बहुतेरे उनके लिए भगवान से दुआ की गुजारिश कर रहे हैं।
वैसे तो यूपी की योगी सरकार ने मोख्तार अंसारी और उनके गुर्गों के बनाए गये साम्राज्य को ध्वस्त करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है। सरकार भी अदालत के सहारे मोख्तार अंसारी को उनके किए गये आपराधिक कृत्य के बारे में सजा दिलाने की पूरी तैयार लगती है। मीडिया भी मामले में 2005 का मऊ दंगा और कृष्णानंद राय हत्याकांड के अलावा अन्य मामलों को यादों के सहारे रोज सुर्खियां बटोरने में लगी है।

लोग मोख्तार को लेकर चाहे जितना भी हो हल्ला क्यों न कर लें लेकिन इतना तो तय है कि मोख्तार ने अपने रसूख की बदौलत देश की सियासत में वह स्थान बनाई है जिसकी बदौलत पंजाब सरकार पर तथा कांग्रेस पर मोख्तार अंसारी को बचाने या उनके पक्ष लेने के आरोप लगातार लगते आ रहे हैं। चाहे पंजाब हो या यूपी मोख्तार सियासतदारों की सियासत में अपने सेफ राजनैतिक गेम को हमेशा खेलते नजर आए हैं। लेकिन वर्तमान की योगी सरकार उनके प्रति क्यों नजरें उनके आपराधिक इतिहास के लिए टेढ़ी की हुई है या इसी बहाने मोख्तार के बढ़ते राजनैतिक कद को छोटा करना चाहती है समझ से परे है। पक्ष विपक्ष में मोख्तार के समर्थक और विरोधी चाहे जितना बोल ले, लेकिन मोख्तार अंसारी के राजनीतिक पकड़ के और चुनाव लड़ने के तौर तरीको के आगे पीछे सभी सभी विपक्षी व सियासतदार बौने साबित हुए हैं। तभी तो मोख्तार अंसारी के मऊ में विधायक बनने के सिलसिले को किसी ने आज तक डिगा नहीं पाया और 2019 के भाजपा लहर में भी विकास की लंबा इतिहास बनाने के बाद भी पूर्व रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा न सिर्फ अफजाल अंसारी से हारे बल्कि वोटों का अंतर इतना था कि सब जनता को दोष देने लगे।
आज अगर कानून या सरकार मोख्तार अंसारी को सजा दिलाने में अगर कामयाब होती है तब तो मोख्तार का सदन में जा पाना मुश्किल होगा। वरना मोख्तार के सियासत की कहानी थमने और रुकने वाली नहीं है। भले ही विपक्षी चाहे जितना भी हो हल्ला मचा ले लेकिन उनके राजनीतिक मैनेजमेंट के आगे सभी पैदल हैं। मोख्तार के राजनीति गुणा गणित को ठीक से समझना होगा। भले ही लोग मोख्तार अंसारी को हिंदू-मुस्लिम के नाम पर बांटकर चुनाव जीतना चाहते हैं लेकिन इस बात से बिल्कुल इनकार नहीं किया जा सकता कि मोख्तार अंसारी मुसलमानों के वोट के साथ-साथ हिंदुओं की अच्छी तादात में वोट पाते हैं, तभी विधायक बनते है। अब इसमें कौन सी जात है और कौन नहीं है यह कह पाना मुश्किल है।

कल मोख्तार अंसारी को पंजाब जेल से चलने के बाद उत्तर प्रदेश के बांदा जेल में पहुंचने को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं और अटकले लगाई जा रही थी या उनके भाई सांसद अफजाल अंसारी ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर काफी भयभीत थे। वहीं उन्होंने बांदा जेल के अंदर पूर्व में विधायक मोख्तार अंसारी को मारने के लिए चाय में जहर डालने की बात दुहरा कर बांदा जेल में असुरक्षित बताया है। ऐसे में मोख्तार अंसारी सुरक्षित बांदा जेल पहुंच गए हैं। वही सोशल मीडिया पर तरह-तरह के अटकलें वह पोस्ट डालने वाले कुछ शान्त हुए हैं।

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