रचनाकार

नही कोई हकीकत में, सभी के रंग बदले है…

-@ अखिलानंद यादव

नही कोई हकीकत में,
सभी के रंग बदले है।
कोई भीतर से है काला
कोई बाहर से उजले है।।
सच के साथ ना कोई ,
मगर हैं! न्याय के पक्षधर।
हम चैतन्य होकर भी ,
लगते आज पुतले है।।

मुझे वो आदमी प्यारा,
जो मनुजता का पुजारी है।
दया और धर्म, धीरज में
जिसकी हिस्सेदारी है।।
जिसे मृत्यु का भय नहीं,
ना जीवन की अभिलाषा है।
सभी राही है! राहों के,
सबकी अपनी तैयारी है।।

अखिल आनंद का यथार्थ,
नहीं कोई समझता है।
जोश में होश गवांकर ,
हर प्राणी बहकता है।।
जीवन का फलसफा जो भी,
समझकर चिंतन करता है।
सीढ़ियों पर सफलता के,
हर कदम आगे बढ़ता है।।


पता – रतनपुरा
जनपद – मऊ (यूपी)
मो 0- 9450461087

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