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कोरोना से न्यायालय पर निर्भर लोगो पर आर्थिक संकठ : एड. अखण्ड प्रकाश पाण्डेय

■ वकील से लेकर मुंशी और टाइपिस्ट से लेकर चायवाले तक..”जिनकी कमाई सुनवाई पर निर्भर होती है”


मऊ। कोरोना टू यदि किसी को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है तो उसमें से एक समाज का प्रतिष्ठित वर्ग अधिवक्ता समाज है, अधिवक्ता जो “रोज़ कुआँ खोद कर पानी पीता” है वो आज असहाय से खुद को समझ रहा है। एक सामान्य अधिवक्ता के लिए न्यायालय बन्द है काम कोई हो नही रह खर्च उतना ही है आय शून्य। लॉकडाउन में वर्चुअल कोर्ट खुला लेकिन उससे सभी और सामान्य अधिवक्ता को कोई लाभ नही मिला ,नतीजा नमक रोटी पर संकट आ गया।लॉकडाउन बढ़ता जा रहा आर्थिक संकठ बढ़ता जा रहा।
कोर्ट से जुड़े लोगों की रोजी रोटी पर भी संकठ
फोटोस्टेट, टाइपिस्ट, कंप्यूटर आपरेटर, फ़ोटो बनाने वाले,स्टैम्प वेंडर जिनकी जीविका का स्रोत एक मात्र न्यायालय है,जहाँ आज सन्नाटा पसरा हुआ है, आज ये सभी आर्थिक तंगी से जूझ रहे है।वजह साफ है ना ही कोई वकील ना ही मुवक्किल नही कोई मुकदमे की पैरवी के लिए न्यायालय पहुँच रहा। ये सभी आत्मनिर्भर होते हुए भी भगवान भरोसे जिंदगी काट रहे है।
#सरकार से निवेदन इस महामारी में अधिवक्ता समाज पर जो आर्थिक संकठ आया है उनके लिए सरकार से विनम्र निवेदन है कि ( प्रदेश के सभी जनपद न्यायाधीश कार्यालय और सम्बंधित बार एसोसिएशन से सूची प्राप्त कर) जिन अधिवक्ताओ के परिवार में कोविड-19 से मृत्यु हुई है उनको कम से कम 500000/- (पांच लाख रुपये) की और अन्य सामान्य अधिवक्ताओ की कम से कम 5000/-(पांच हजार रुपये) की और पंजीकृत स्टैम्प वेंडर, टाइपिस्ट और फोटोकॉपी दुकानदारों को 3000/- प्रति माह दे सरकार।
ताकि आम जनमानस को न्याय दिलाने में सहायक अधिवक्ता समाज एक बार फिर से सक्रिय भूमिका निभा सकें।

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