अपना जिलारचनाकार

“नारी हो तुम नारीका सम्मान करो”

इन्दु तोदी, धरान (नेपाल)

नारी हो तुम नारी का सम्मान करो !
पल पल मत उसका अपमान करो ।

तुम से अधिक समझ सकेगा न कोई उसे, 
बात बेबात मत उसपर घात प्रतिघात करो।

उँचनीच ,अमीर,गरीब सब स्त्री मन एक है,
मन वचन से मत उस पर ठेस करो।

 
प्रेम से सहज ही दुनिया जीती जा सकती है, 
सब के भितर प्रेम, आशा, उल्लास भरो।

खून के ही नही प्यारके रिश्ते भी हो सकते
हैं सगे, उन्हे दिल से कबुल करो ।
  
तुम्हारी ही तरह सबको स्वाभिमान प्यारा है,  
उस की कदर करो सदा संरक्षित करो।
 
आवेग ईर्ष्या भयावह विनाशकारी डायन है,
मत पास फटकने दो जल्दी खुद से दूर करो।
 
बंध जाती गाँठ अक्सर छोटी छोटी बातों से,
मिल सुलझालो समय में शंका सब दूर करो।

शान्ती सुख की कुंजी है सुख से ही समृद्धि है,
सरलता से सब बातों का हल करो ।
 
मत जलो पर अन्याय अत्याचार की ज्वला में  
अब और अधिक तुम हे नारी !
अधिकार रक्षा हेतु  बुलन्द अपनी आवाज करो ।
 
इतिहास में नारीगाथा पढ पढकर ही मत इतराओ, 
यथार्थ में भी ज़रा झाँको गौर करो।
   
अलग अलग,भावना के विभेद से ये जो हम सब  
बटी पड़ी हैं,उन्हे मिलाओ पास लाओ एक करो।
 
मजबुत बनो,खुदको जोड़कर ओरोंको जोड़ो,  
बेमनस्यता के धरातल को एक समान पाटकर,  
मजबुत सुन्दर कोई नमुना इमारत खड़ी करो,
 
फिर जहान में पुरुषों की बराबरी करनेवाली,
सशक्त आदर्श नारी होने का तुम दम्भ भरो  । ।

One thought on ““नारी हो तुम नारीका सम्मान करो”

  • Manisha Maru

    नमन आपकी प्रेरणा दायक लेखनी को 🙏🙏🌹🌹

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