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अटॉर्नी जनरल वेणु गोपाल के कथन पर सुप्रीम कोर्ट संविधान पीठ तत्काल संज्ञान ले : अतुल अंजान

दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण के मामले में संविधान पीठ के सम्मुख चर्चा करते हुए अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने उन्हें हर आरोपों से बरी करने का जोरदार वक्तव्य दिया । वहीं दूसरी ओर उन्होंने इस बात का भी खुलासा किया कि उन्होंने कई जजों से सुप्रीम कोर्ट के से बातचीत करने पर उन्हें स्वयं पांच जजों ने कहा कि “सर्वोच्च अदालत में लोकतंत्र विफल हो गया ” रहस्य उद्घाटन किया, यह एक एक गंभीर रहस्य उद्घाटन है । जब सुप्रीम कोर्ट के अंदर जजों में इस तरह की धारणा हो तो संविधान पीठ प्रशांत भूषण के विरूद्ध जो आरोप सिध्द करने पर तुला है वह अपनी वैधानिकता स्वयं कमजोर कर रहा है । उक्त प्रतिक्रिया व्यक्त देते हुए भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राष्ट्रीय सचिव अतुल कुमार अनजान ने सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से अपील की है कि वह तत्काल अटॉर्नी जनरल की कथन पर विस्तृत चर्चा करें , इसका निवारण करें अन्यथा सुप्रीम कोर्ट की साख साधारण जनों में कहां टिकेगी कोई नहीं जानता । वरिष्ठ कम्युनिस्ट नेता अतुल कुमार अनजान ने आगे मुख्य न्यायाधीश को सलाह दी है कि यह उचित होगा संविधान पीठ के माननीय जज सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री दवे एवं श्री प्रशांत भूषण उनके कार्यालय में बैठकर इस समस्या का हल निकाले जैसा कि अतीत में मुंबई के कोर्ट में प्रमोद महाजन के भाई प्रवीण महाजन द्वारा जिस प्रकार तथ्यों को कोर्ट में रखा जा रहा था उस समय जज ने कहा कि सार्वजनिक हित में इस तरह के बयान आप मेरे कमरे के अंदर बंद कमरे में दीजिए । कोर्ट के निर्णय में उन्होंने प्रवीण के तमाम तथ्यों को इसलिए नहीं शामिल किया क्योंकि उन खुलासों से सिर्फ सामाजिक राजनीतिक भूचाल ही नहीं आ जाता वरण समाज में हाला डोला आ जाता । सुप्रीम कोर्ट उसके विद्वान जज गण एवं वरिष्ठ अधिवक्ता गण आज इस लोकतंत्र की सर्वोच्च संस्था को बचाने के लिए मिलजुल कर काम करेंअन्यथा सर्वोच्च न्यायालय के प्रति जन भावना अत्यंत कष्टदायक एवं उचित नहीं होगी।

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