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ऑटो चालक का बेटा और खुद वेटर का काम करने वाले शेख अंसार अहमद 21 साल में कैसे बनें IAS? पढ़िए, फर्श से अर्श तक की जबरदस्त कहानी

शेख अंसार अहमद के पिता ऑटो-रिक्शा चलाते थे

भाई मैकेनिक था और उन्हें खुद पढ़ाई के लिए करना पड़ा था वेटर का काम

खोने के लिए जब कुछ ना हो तो सब कुछ पाने का रास्ता साफ हो जाता है, लेकिन इसके लिए मजबूत हौसलो और तय लक्ष्य का होना जरूरी है. महाराष्ट्र के एक ऑटोचालक के बेटे और गैराज में काम करने वाले के भाई शेख अंसार अहमद  ने सभी बाधाओं को पार करते हुए…संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में सफलता हासिल की…सूखा प्रभावित मराठवाड़ा क्षेत्र के जालना जिले के शेलगांव गांव के रहने वाले शेख ने बचपन से ही कई परेशानियां झेली…जब वो चौथी कक्षा में पढ़ रहे थे…तो उनके पिता चाहते थे कि…वो आगे की पढ़ाई ना करें…और किसी काम में लग जाएं…इसके लिए शेख के पिता ने उनके स्कूल में जाकर उनके टीचर से बात की…लेकिन टीचर जिनका नाम पडुलकर था…उन्होंने शेख के पिता को समझाया कि…वो एक होनहार बच्चे हैं…और पढ़ाई में काफी अच्छा कर सकते हैं…टीचर के समझाने पर शेख के पिता मान गएं…और शेख की पढ़ाई जारी रखा…

शेख बचपन से ही पढ़ाई में बहुत होनहार थे…शेख ने जालना जिलाल परिषद हाई स्कूल से अपनी शुरुआती शिक्षा हासिल की…यहां उऩ्होंने दसवीं तक की पढ़ाई पूरी की…वो काफी अच्छी स्पीच भी दे लेते थे…अक्सर वो स्पीच प्रतियोगिताओं में भाग लेते थे…गरीबी के कारण शेख के ड्रेस फटे और पुराने होते थे…लेकिन उन्हें इस बात का मलाल नहीं था…शेख के घर में कोई पढ़ा लिखा नहीं था…इसलिए उनके आस-पास पढ़ाई का बिल्कुल माहौल नहीं था…यही वजह थी कि…शेख की दोनों बहनें भी सातवीं तक ही पढ़ाई कर सकी…और बेहद कम उम्र करीब 14, 15 साल में ही उनकी शादी हो गई…शेख तब काफी छोटे थे…शेख के पिता जितना कमाते थे…उससे घर का खर्च नहीं चल पाता था…जिसकी वजह से उनकी मां खेतों में मजदूरी करती थी…एक तरफ घर का खर्च और दूसरी तरफ शेख की पढ़ाई का खर्च ने शेख को भी काम करने पर मजबूर कर दिया…जब शेख ने दसवीं की परीक्षा पास कर ली…तो उन्होंने एक होटल में वेटर का काम किया…ताकि उससे जो पैसा मिले वो उस पैसे से कंप्यूटर कोर्स कर सकें…

12वीं के बाद शेख अंसार ने एक शीड की कंपनी में भी लेबर का काम किया…स्पीच देने में अव्वल शेख ने एक प्रतियोगिता में 10 हजार रुपये जीते थे…उन पैसों से उऩ्होंने अपनी मां के लिए साड़ी खरीदी…और उनको गिफ्ट किया..पढ़ाई के साथ-साथ शेख अपने पिता की भी मदद करते थे…वो रोज सुबह अपने पिता के ऑटो की सफाई करते थे…ग्यारहवीं और बारहवीं की पढ़ाई शेख ने जालना के बद्री नारायण कॉलेज से पूरी की…और अच्छे नंबर हासिल किये..शेख अधिकारी तो बनना चाहते थे…लेकिन अधिकारी कैसे बनते हैं…इसके बारे में उन्हें नहीं पता था…दरअसल शेख में अधिकारी बनने की ललक तब पैदा हुई…जब वो बहुत छोटे थे…और उनके पिता से एक सरकारी अधिकारी ने 3 हजार रुपये बतौर घूस मांगे थे…इस बात से दुखी होकर शेख ने अधिकारी बनने की ठान ली थी…जब वो दसवीं में थे…तो उनके टीचर ने उन्हें महाराष्ट्र पब्लिक कमीशन की परीक्षा पास की थी…शेख ने उस टीचर से मिलकर उस परीक्षा के बारे में जानकारी हासिल की…और वो भी उस परीक्षा की तैयारी में जुट गए…तब तक उन्हें आईएएस की परीक्षा के बारे में कोई जानकारी नहीं थी…जब शेख ने बारहवीं में थे…तो उनके टीचर अनिरूद्ध जो उनके ही कॉलेज में पढ़ाते थे…उन्होंने शेख को आईएएस की परीक्षा के बारे में बताया…और कहा कि अगर तुम बारहवीं में अच्छे नंबर लाते हो…तो पुणे के किसी अच्छे कॉलेज में तुम्हारा एडमिशन हो जाएगा…और तुम वहां आईएएस परीक्षा की तैयारी भी कर सकोगे…टीचर के बताये हुए रास्ते पर शेख चल पड़ें…और 12वीं में अच्छे नंबर हासिल कर पुणे के फर्ग्‍युसन कॉलेज से 2015 में 73 फीसदी नंबरों के साथ राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की…उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा में भी इसी विषय को मुख्य विषय बनाया…यहां अपनी पढ़ाई के दौरान उन्होंने एक कोचिंग में असिस्टेंट का काम किया..और 14 हजार रुपये कमाये…जिसमें से 10 हजार रुपये की किताबे उन्होंने खरीदी…वो काफी पतले दुबले थे…इसलिए उनके दोस्त उनसे जीम ज्वाइन करने के लिए बोलते थे…लेकिन वो अपना पैसा पढ़ाई के अवाला कहीं और खर्च नहीं करते थे…हालांकि उन्हें मूवी देखने का शौक था…वो अक्सर दोस्तों के फिल्में देखने जाया करते थे…शेख बताते हैं कि…बचपन से पढ़ाई में उनका मन लगता है..इसलिए घर से ज्यादा वो अपना समय स्कूल में बिताते थे…वो पढ़ने में काफी अच्छे थे…इसलिए उनके स्कूल में उन्हें काफी सम्मान और टीचरों से प्यार मिलता था…जब वो केजी में पढ़ रह थे..तो एक कविता प्रतियोगिता में उन्होंने जीत दर्ज की थी…जिससे वो काफी खुश हुएं..शेख के रोल मॉडल महात्मा गांधी और भीम राव अंबेडकर हैं…एक बार शेख इसलिए बहुत दुखी हो गए…क्योंकि महाराष्ट्र पब्लिक कमिशन की परीक्षा में वो फेल हो गएं…तब लोग उनसे कहने लगें कि…तुम जब इस परीक्षा में नहीं पास हो पा रहे…तो आईएस की परीक्षा कैसे क्वालिफाई करोगे…इस बात से शेख बहुत दुखी हुएं…लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी…जब वो आईएस का इंटरव्यू देकर अपने घर पहुंचे…तो उऩ्होंने घर वालों से बोला कि…आप लोग इस घर को बदल दें…क्योंकि उनको विश्वास था कि…वो इस परीक्षा में जरूर पास हो जाएंगे…और हुआ भी वैसा ही…शेख ने साल 2015 में इस परीक्षा को पहले ही प्रयास में पास कर लिया…और 361वां रैंक हासिल किया…वह अन्य पिछड़ा वर्ग श्रेणी से आने के कारण भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) में जाने के हकदार बनें। इस तरह उनके नाम देश का सबसे युवा आईएएस अधिकारी बनने का खिताब भी हासिल है। शेख कहते हैं, “मैं तीन अलग-अलग श्रेणियों में हाशिये पर था। मैं एक पिछड़े अविकसित क्षेत्र से हूं। मैं एक गरीब घर से हूं और एक अल्पसंख्यक समुदाय से हूं। मैं एक प्रशासक के रूप में इन सभी मुद्दों से निपट सकता हूं, क्योंकि मैंने इसे करीब से देखा है।”

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