लाॅक डाउन और भारत

राजनीति के कोरोना योद्धाओं को भी एक सलाम

(यशोदा श्रीवास्तव)

लखनऊ। कोरोना का भयावह प्रतिशत नदी की बाढ़ की तरह बढ़ रहा है। इससे बचाव के लिए लाकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग ही एक सहारा था, शराब की दुकानें खोलकर वह भी तार तार हो गया। अब बचने का सिर्फ एक उपाय है, वह है बचाव में बचाव! और इसके लिए हमें स्वयं सतर्क रहना होगा। सबकुछ सरकार करे, इस भरोसे रहना ठीक नहीं है। भाजपा के एक नेता की टिप्पणी क्या खूब है।उसका दो टूक कहना है कि सरकार ने पब्लिक को जागरूक किया,कोरोना की भयावहता बताया, ये कम है ?

खैर! कोरोना के इस दौर में एक नया शब्द खूब चर्चित हुआ, वह है कोरोना योद्धा! बहुत सारे कोरोना योद्धाओं के दर्शन हुए।हमने भी ताली और थाली बजाकर, फिर टार्च और मोबाइल की फ्लैश लाइटें जलाकर उनका खैरमकदम किया। उनके उत्साहवर्धन में कुछ कमी न रह जाय इसलिए हाल ही सेना के हेलीकॉप्टर से उनपर फूलों की वर्षा भी की गई।

सच है, कोरोना काल में डाक्टर, अन्य मेडिकल स्टाफ, पुलिसकर्मी आदि निसंदेह सेवा भाव से सर्मपित नजर आए लेकिन हमारे राजनितिक रहनुमा कहां गुम रह गए? यह चौंका रहा था। पूर्वांचल के जिलों में नजर डालें तो मात्र दो विधायक, एक सांसद व सत्ता दल के एक जिलाध्यक्ष ही लोगों के बीच में नजर आए। इसमें तीन सिद्धार्थ नगर जिले के हैं जबकि एक विधायक महराजगंज जिले के हैं। इस महामारी काल में चुने हुए जनप्रतिनिधियों की जनता के बीच गैरमौजूदगी का हाल तब है जब जनता को उनकी ज्यादा जरूरत है। न केवल गोरखपुर और बस्ती मंडल अपितु समूचे पूर्वांचल के रहनुमा जनता को राम भरोसे छोड़कर “लाकडाउन” का अक्षरशः पालन करते नजर आए। कोई लखनऊ स्थित अपने आवास पर बंद रहा तो कोई अपने फर्महाउस पर। यह बताने की जरूरत नहीं कि कोरोना से बचने के लिए घरों में कैद रहना जरूरी है। बावजूद इसके डुमरियागंज के सांसद जगदंबिका पाल, डुमरियागंज विधानसभा क्षेत्र के विधायक राघवेंद्र प्रताप सिंह, महराजगंज जिले के फरेंदा विधानसभा क्षेत्र के विधायक बजरंग बहादुर सिंह और सिद्धार्थ नगर के जिलाध्यक्ष गोविंद माधव जनता के बीच नीरंतर देखे गए। हिंयुवा वाहिनी के प्रदेश प्रभारी व विधायक राघवेंद्र सिंह ने अपने क्षेत्र के क्वारंटाइन केंद्रों पर दाखिल किए गए बाहर के संदिग्ध कोरोना वाहकों का पूरे समय तक देखभाल किया,उनके खाने पीने रहने आदि की व्यवस्था पर भी ध्यान दिया।इसके अलावा अपने संसाधनों से सफाईकर्मी से लेकर तपती धूप में खड़े सिपाहियों और अन्य लोगों में मास्क,सेनिटाइजर तथा गमछा प्रदान कर उनका उत्साहवर्धन किया।आज भी वे एहतियात के साथ क्षेत्र में जमें हुए हैं।

सांसद जगदंबिका पाल भी पूरे लाव लश्कर के साथ क्षेत्र में जमें हुए हैं। बाहर से आए श्रमिकों के क्वारंटाइन से लेकर उनके खाने पीने की देखभाल स्वयं तथा अपने लोगों से करवाते रहे।लाकडाउन में कोई गरीब भूखों न रहे इसे लेकर वे सतर्क दिखे। कोरोना से बचाव का ढेर सारा सामान भी उन्होंने लोगों में वितरित किया। राशन और खाद्य सामग्री का अभाव कत्तई नहीं होने दिया। इसी जिले के जिलाध्यक्ष गोविंद माधव अपने संसाधनों से लैश होकर क्षेत्र में मौजूद रहे। सरकारी सूत्रों के अनुसार जिले में बाहर से 35,000 लोग आ चुके हैं। सभी अलग स्थानों पर क्वारंटाइन हैं। सुखद है कि सांसद पाल, विधायक राघवेंद्र सिंह तथा जिलाध्यक्ष गोविंद माधव सभी के प्रति न केवल संवेदनशील हैं, उनकी देखभाल पूरे मनोयोग और सेवा भाव से कर रहे हैं।

महराजगंज में भी सांसद हैं, जिलाध्यक्ष तथा पांच पांच सत्ता पक्ष के विधायक हैं।लेकिन अकेले फरेंदा विधानसभा क्षेत्र के विधायक बजरंग बहादुर सिंह ही अपनों के बीच नजर आ रहे हैं। इनके विधानसभा क्षेत्र फरेंदा में बाहर से आए मजदूरों के लिए आश्रय केंद्र बनाया गया है।जिले भर के बाहरी मजदूर यहां लाए जाते हैं और यहां से उन्हें निर्धारित जगहों पर भेजा जाता है। क्षेत्रीय विधायक होने का फर्ज निभाते हुए विधायक बजरंग बहादुर यहां आए एक एक मजदूरों से बातकर उनका कुशल क्षेम पूछते हैं, उन्हें जरूरी सामान उपलब्ध कराते हैं।

दरअसल कोरोना से निपटने के लिए तमाम महकमों के लोगों को झोंक दिया गया है लेकिन जनता से चुने हुए प्रतिनिधि अदृष्य है। फिलहाल पूर्वांचल के जिलों में नजर दौड़ाई गई तो मात्र उपरोक्त चार लोग ही सरकार के साथ कदम मिलाकर चलते हुए दिखाई पड़े। ऐसे में राजनीतिक क्षेत्र के इन कोरोना योद्धाओं को भी तो एक सलाम बनता है।

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