मिसाल-ए-मऊ

मऊ के युवा वैज्ञानिक फडींद्र ने सौर ऊर्जा व मदर बोर्ड निर्माण में देश को किया आत्म निर्भर

०भारत में पहली बार बना सिल्वर नैनो पेस्ट, बीएचयू से शिक्षित वैज्ञानिकों द्वारा निर्मित होगा सिल्वर नैनो पेस्ट

मऊ।ऊर्जा के क्षेत्र में अभूतपूर्व योगदान देने वाला सिल्वर पेस्ट का निर्माण अब बीएचयू में स्थित केंद्रीय अनुसंधान केंद्र के बायोनेस्ट सेक्शन में साइटेकइसी रिसर्च एंड टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड कम्पनी द्वारा किया गया है । बीएचयू के विज्ञान संस्थान से मैटेरियल साइंस में पीएचडी व साइटेकइसी रिसर्च एंड टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड कम्पनी के फाउंडर व डायरेक्टर डॉ फणींद्र पति पाण्डेय ने अपने सिल्वर नैनो बेस्ड पेस्ट की विशेषताएं बताई , यह पेस्ट सोलर पैनल इंडस्ट्रीज, मदरबोर्ड चिप, बायो सेंसिंग उपकरण के निर्माण में उपयोग किया जाएगा । इस पेस्ट में नैनो डायमेंशन सिल्वर पाउडर उपयोग करने के कारण इसकी उपयोगिता बढ़ गई है और बाजार मूल्य में कमी आई है । अभी तक यह प्रोडक्ट जर्मनी, अमेरिका , यूके, ताईवान, सिंगापुर आदि देशों से आयात किया जा रहा है और लगभग देश का 30 हजार करोड़ रूपए विदेशी कंपनियों को जा रहा है । वैज्ञानिक डॉ फणींद्र ने “अपना मऊ” से बताया कि सिल्वर पेस्ट का नैनो संस्करण अब जल्द ही भारत समेत दुनिया भर के देशों में यह प्रोडक्ट निर्यात किया जाएगा । डॉ फणींद्र कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के आत्मानिर्भर भारत के मिशन को साकार करने में यह प्रोडक्ट महत्वपूर्ण योगदान देगा । बायोनेस्ट में स्थापित यह कंपनी भारत सरकार के वाणिज्य एवम उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत स्टार्टअप इंडिया द्वारा संचालित है । हाल ही में केन्द्रीय वाणिज्य एवम उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बीएचयू आकर डॉ फणींद्र पति पाण्डेय से मिल कर इस प्रोडक्ट के बारे में विस्तार से समझा तथा सरकार से भरपूर मदद का आश्वासन दिया व उत्साह वर्धन किया । डॉ फणींद्र पति पाण्डेय मऊ के इमलियाडीह गांव के निवासी हैं जो हालही में नगर पालिका परिषद मऊ से जुड़ा है , इनके पिता डॉ प्रवीण पति पाण्डेय मुहम्मदाबाद गोहना में चिकित्सक हैं तथा माता श्रीमती रीता त्रिपाठी कंपोजिट विद्यालय मुहम्मदाबाद एक की प्रधानाध्यापिका हैं ।

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