बड़े नेताओं की खातिरदारी और स्वागत तक सीमित स्थानीय नेता
@ विकास सिंह निकुम्भ…
मऊ। घोसी उपचुनाव को लेकर सत्ताधारी दल से लेकर मुख्य विपक्षी दल के सभी प्रमुख नेता जिले से लेकर घोसी में कैम्प किया हुए हैं और अपने-अपने जीत के बड़े- बड़े दावे कर रहे हैं। जबकि जमीनी हकीकत कुछ और ही बया कर रही है, दोनों दलों में यह देखा जा रहा है कि बाहरी नेता स्थानीय नेताओं जो जिले से लेकर चट्टी चौराहों पर जमे रहते है उन्ही के बीच प्रचार कर रहें है, जनता से किसी की भेंट नही हो रही है। एक सत्ताधारी दल के नेता ने नाम नही छापने के शर्त पर बताया कि घोसी उपचुनाव के बहाने स्थानीय नेता बड़े नेताओं के आसपास इसलिए ज्यादा समय बिता रहे है कि इसमें किसी को जिलाध्यक्ष बनना है, किसी को लोकसभा का टिकट चाहिए, ऐसे नेता केवल बाहर से आये नेताओं की अगवानी, स्वागत और खातिरदारी में लगे है। बाहर से आये नेता भी बरसात के मौसम में जनता के बीच नही जाना चाहते चट्टी चौराहों या अपने पार्टी के किसी बड़े नेता के यहां एक दो सभा का आयोजन कर जीत के अपने हिसाब से बड़े दावे करके और अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म को अपडेट करने तक ही सीमित हो गया है। सत्ता से जुड़े स्थानीय नेताओं के लिए एक और फजीहत हो गई है कोई नेता दोपहर को लखनऊ में पार्टी ज्वाइन करता है, शाम को ना चाहते हुए भी पार्टी कार्यालय पर उसका स्वागत कार्यक्रम करना है इसी तरह पूरा दिन खत्म हो जाता है, फिर बड़े कौन से नेता कहा रुके है उनकी गणेश परिक्रमा कर के घर के लिए निकल जाना फिर सुबह से वही कहानी शुरू। नेता जनता से इसी तरह से दूर है, इस चुनाव से घोसी के मूल मुद्दों पर किसी दल का नेता बात नही कर है, बात हो रही है तो केवल जाति की किस जाति का कितना वोट है, कौन सी जाति किस दल के साथ है, और यहा हर जाति के दो- तीन ठेकेदार भी है जो अपनी क्षमता के हिसाब से अपनी जाति के वोट को बेचने के लिए बैठे हुए हैं। रोटी, कपड़ा, मकान, बिजली, पानी, सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसे मुद्दे इस चुनाव से कोसो दूर हो चले हैं। मानों नेताओं ने जैसे कसम खाई है कि जो जनता की मूलभूत आवश्यकता है उसे पर बात ना करके जाति, धर्म, अगड़ा, पिछड़ा के नाम पर लोगों को बाट कर धनबल बाहुबल चाहे जैसे भी चुनाव जीतकर निकल जाना है। नेता बाहरी हो या स्थानीय सब अपनी गोटी सेट कर रहे है और इनसब के बीच बेचारी घोसी की भोली भाली जनता जाति, धर्म और अगड़ा पिछड़ा के चक्कर मे अपने आपसी सम्बन्ध खराब कर रही है और अपनी मूल आवश्यकताओं और विकास से दूर हो रही है। आप विचार करे उपचुनाव में इतने मन्त्रियों ने डेरा डाला है किसी गांव में जाकर किसी मंत्री ने चौपाल लगाकर कहा हो कि मेरे विभाग से सम्बंधित घोसी की जनता को क्या समस्या है उसका निस्तारण मैं तुरन्त करुगा। नही मंत्री जी भी अपने जाति के किसी स्थानीय नेता को मजबूती से पकड़े हुए है, और स्थानीय नेताजी भी इस बात का पूरा ख्याल रखे हुए है कि मुझे बाईपास कर के नेता जी से कोई ना मिले। क्या यही लोकतंत्र है, घोसी की जनता अभी भी समय है सचेत हो जाइए, मतदान 100 बार सोच के करिये ये अनमोल है, मतदान उसी को करे जो आपकी समस्याओं को जनता हो उससे जुड़ा हो, विकास के नाम पर अपने मत का प्रयोग करे जाती,धर्म, अगड़ा पिछड़ा के चक्कर मे ना पड़े नही तो घोसी का विकास कही पीछे छूट जाएगा।
