बसपा प्रत्याशी के मैदान में ना होने से दलित बस्तियों में बढ़ी नेताओं की चहलकदमी
@विकास सिंह निकुम्भ…
मऊ। घोसी उपचुनाव अपने चरम पर है सत्ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी ने समाजवादी पार्टी से आए दारा सिंह चौहान को अपना प्रत्याशी बनाया है, वही मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी ने अपने पुराने नेता सुधाकर सिंह पर विश्वास जताया है। उपचुनाव में बसपा प्रत्याशी के न होने से लड़ाई सीधे-सीधे भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी के बीच है। भाजपा और सपा के मूल वोटर अपने पार्टी के साथ मजबूती से खड़े दिख रहे हैं, तो वहीं कुछ वोटर कुछ मुद्दों पर अपने दल से नाराज़ होकर चुप्पी भी साधे हैं। वहीं दलित मतदाता बसपा से कोई उम्मीदवार न होने से अपना राज क़तई नहीं खोल रहे हैं कि वे सपा के साथ जा रहे कि भाजपा के साथ। या वह तय नहीं कर पा रहे है कि वह किसके साथ जाएँगे। इन सबके बीच दलित बस्तियों में भाजपा व सपा के नेताओं की चहलकदमी बढ़ गई है। दोनों ही दल अपने-अपने तरीके से दलित मतदाताओं को रिझाने में लगे हैं, भाजपा नेता केंद्र और प्रदेश सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं की दुहाई देकर मतदाताओं को अपने पक्ष में करने की पुरजोर कोशिश में लगे हैं, वहीं समाजवादी पार्टी द्वारा दारा चौहान के दलबदल का मुद्दा उठाकर और सुधाकर सिंह को जननेता और लोकल बताकर दलित मतदाताओं को साधने की कोशिश में लगे है। समाजवादियों का कहना है कि बहन जी ने दारा सिंह चौहान को बसपा का संसदीय दल का नेता बनाया था, और कई बार राजनीतिक के शीर्ष पदों पर बैठाया, लेकिन दारा चौहान बहन जी को धोखा देकर सत्ता के करीब रहने के लिए दलबदल कर लिए, तो ऐसे नेता के साथ दलित कभी नहीं जाएंगे। वहीं भाजपा नेताओं का कहना है कि दारा चौहान बड़े नेता है अगर वह चुनाव जीतते हैं तो योगी मंत्रिमंडल में मंत्री बनेंगे और घोसी विधानसभा के साथ-साथ पूरे जनपद का विकास करेंगे। दोनों दलों के नेताओं द्वारा दलित मतदाताओं को अपने पाले में लाने के लिए तरह तरह के पैंतरे आजमाए जा रहे हैं लेकिन दलित मतदाता अभी अपना पत्ता खोलने को तैयार नहीं दिख रहा है। पिछले दिनों सुधाकर सिंह ने घोसी की जनता से भावुक अपील कर कहा कि 40 वर्षों के मेरे लंबे राजनैतिक सफर में मैंने कभी दल बदल नहीं किया और जब देश में इमरजेंसी लगा था तो मैं 2 वर्षों तक जेल के सलाखों के पीछे भी रहा, यह मेरा आखिरी चुनाव है अगर घोसी को स्थाई नेता चाहिए तो समाजवादी पार्टी को वोट करें, आप जब भी मुझे खोजेगे तो मैं आपको उसी नीम के पेड़ के नीचे मिल जाऊंगा, दलित मतदाताओं की सवाल पर कहा कि सुधाकर ने कभी जाति और धर्म की राजनीति नहीं किया है, इतिहास गवाह है कि एक दलित साथी को जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठाने के लिए सुधाकर ने क्या कुछ नहीं किया था। अब यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा की घोसी का दलित मतदाता भारतीय जनता पार्टी द्वारा घोषित प्रत्याशी दारा सिंह चौहान के साथ जाता है या सुधाकर से हाथ मिलाता है। यह तो तय है कि इस उपचुनाव का भाग्य विधाता दलित ही है, दलित मतदाता है जिसको चाहेगा वही लखनऊ पहुंच पाएगा।

