“घर है हमारा”

डा. प्रमोद कुमार अनंग…
हमारे लिए एक, गजल लिख के लाओ।
बनावट नहीं तुम, असल लिख के लाओ।।
मोहब्बत की बस्ती में, घर है हमारा।
नही कर सको तो, अमल लिख के लाओ।।
सफर में दुवाओं की, कीमत बहुत है।
नहीं होगी बाधा, फजल लिख के लाओ।।
कभी स्लोगनों से, सुधरती हो दुनिया।
तो तुमको कसम है, नकल लिख के लाओ।।
बड़ी मुश्किलों से, जहां जानता है।
किया तुमने कैसे दखल, लिख के लाओ।।
हुआ है उजाला, कोई खिल रहा तो।
अंधेरों के तन पर, कमल लिख के लाओ।।
जलाई गईं, बस्तियां और जंगल।
बना होगा कोई महल, लिख के लाओ।।
बड़े बेरहम लोग, रहते यहां हैं।
तुम्हें करने होंगे पहल, लिख के लाओ।।…“अनंग”

