परमवीर चक्र विजेता वीर अब्दुल हमीद की मनाई गई 53वीं शहादत दिवस
◆ अब्दुल हमीद की जन्मस्थली तीर्थस्थान के समान : अमर सिंह
गाजीपुर। आपका प्रेम और सेना के प्रति लगाव हमें तमाम मुश्किलों से लड़ने में ताकत प्रदान करता है। हम सैनिकों को एक मजबूत भरोसा रहता है कि हम यदि शहीद भी हुए तो हमारे पीछे हमारा पूरा देश खड़ा हुआ है। आपके प्रेम और लगाव से हमें और मजबूती मिलती है। जितना प्रेम भारतीय जनता द्वारा सैनिकों को मिलता है मुझे नहीं लगता कि इतना प्रेम कोई और पाता है। उक्त बातें परमवीर चक्र विजेता शहीद वीर अब्दुल हमीद के 53वें शहादत दिवस पर श्रद्धांजलि अर्पित करने आए 39GTC के कमांडिंग ऑफिसर ब्रिगेडियर एचएस बंसल ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा।
गौरतलब हो कि 1965 भारत पाकिस्तान युद्ध में अदम्य वीरता और साहस का परिचय देते हुए वीर अब्दुल हमीद ने उस समय अमेरिका निर्मित अजेय समझे जाने वाले पैंटन टैंक को ध्वस्त कर दिया था। इस युद्ध में अब्दुल हमीद शहादत को प्राप्त हुए जिन्हें मरणोपरांत सेना का सर्वोच्च सम्मान परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया था। जिनकी उनके पैतृक गांव में 10 सितंबर को 53 वी शहादत दिवस आयोजित की गई थी । शहीद वीर अब्दुल हमीद के पैतृक गांव धामुपुर में आयोजित शहादत दिवस समारोह को संबोधित करते हुए एचएस बंसल ने कहाकि अब्दुल हमीद के वीरता के आगे अमेरिका निर्मित अजेय माना जाने वाला पैटन टैंक भी नतमस्तक हुआ था।
ऐसे वीर सपूत की धरती पर आने से हमें ऊर्जा प्राप्त होती है। इसके साथ ही उन्होंने नौजवानों का उत्साह देखते हुए कहा कि यह अब्दुल हमीद के प्रति प्रेम ही है कि गाजीपुर की धरती से सेना में जाने के लिए युवाओं की बड़ी फौज तैयार रहती है। इनके उत्साह को देखते हुए आगामी अप्रैल 2019 में गाजीपुर में सेना भर्ती मेला भी आयोजित किया जा सकता है। इस अवसर पर उन्होंने थल सेनाध्यक्ष जनरल बिपिन रावत द्वारा यहां की रसूलन बीबी को संबोधित एक पत्र मंच से पढ़कर सुनाया। जिसमें थल सेनाध्यक्ष जनरल बिपिन रावत ने परमवीर चक्र विजेता शहीद वीर अब्दुल हमीद को श्रद्धांजलि अर्पित किया। इसके साथ ही जनरल रावत ने शहीद की धर्मपत्नी रसूलन बीबी व परिजनों के प्रति कृतज्ञता जाहिर करते हुए 1965 की लड़ाई में शहीद सभी वीर जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित किया।
अब्दुल हमीद की जन्मस्थली तीर्थस्थान के समान : अमर सिंह
वीर अब्दुल हमीद के शहादत दिवस में श्रद्धांजलि अर्पित करने पहुंचे राज्यसभा सांसद अमर सिंह ने कहा कि शहीदे आजम अब्दुल हमीद की जन्मस्थली एक तीर्थस्थली से कम नहीं। जिस प्रकार भगवान राम की जन्म स्थली होने के नाते अयोध्या को तीर्थ स्थली का दर्जा प्राप्त है, उसी प्रकार देश के लिए प्राण न्योछावर करने वाले वीर सपूत अब्दुल हमीद की जन्मस्थली भी एक तीर्थ स्थल के समान है। उन्होंने कहा कि उत्कर्ष व बलिदान की सीमा नहीं होती, एक शहीद जीवन मरण से ऊपर हो जाता है। ऐसे में हम यह कतई नहीं कर सकते कि अब्दुल हमीद मरे, अब्दुल हमीद मरे नहीं बल्कि वे करोड़ों लोगों के दिलों में जिंदा है। अब्दुल हमीद ने राष्ट्रधर्म की लड़ाई लड़ी थी। जिस प्रकार रोशन सिंह, अशफाकउल्लाह, रामप्रसाद बिस्मिल, टीपू सुल्तान, खान अब्दुल गफ्फार सैयद हैदर अली इत्यादि ने राष्ट्रधर्म की लड़ाई में जीवन को समर्पित किया था। ऐसे लोगों को किसी धर्म या जाति में नहीं बांटा जा सकता, इनका एक ही धर्म रहा है हिंदुस्तानियत। हिंदुस्तान के लिए जीने मरने वाले राष्ट्र में सर्वोपरि होते हैं। राष्ट्रधर्म के लिए जितने भी युद्ध हुए हैं उसमें सभी राष्ट्र धर्म के लिए लड़ने वाले पूजनीय हैं। चाहे राम रावण की लड़ाई रही हो या कौरव पांडव की लड़ाई से लगायत कर्बला की लड़ाई तक केवल राष्ट्रधर्म की लड़ाई हुई है। हिंदी, हिंदू , हिंदुस्तान जिंदाबाद को चरितार्थ करते हैं अब्दुल हमीद जैसे शूरवीर। यदि वीर अब्दुल हमीद ने जंगे मैदान में धर्म देखा होता तो सामने के सभी पाकिस्तानी सेना के जवान इस्लाम धर्म के अनुयाई थे। लेकिन अब्दुल हमीद ने राष्ट्र धर्म का पालन किया। ऐसे शहीद हमेशा पूजनीय होते हैं, इनके जन्मस्थली पर आकर मैं अपने आप को धन्य समझता हूं।
इसके पूर्व ब्रिगेडियर एचएस बंसल, अमर सिंह सहित सभी आगंतुकों ने परमवीर चक्र विजेता शहीद वीर अब्दुल हमीद की मूर्ति पर माल्यार्पण व पुष्पचक्र समर्पित कर पुष्पांजलि अर्पित किया।


