“राष्ट्रपुत्री’ लता दीदी की अंतिम क्षण की छवि को जिसने भी वायरल किया एक “क्रूर-अपराध” किया

ओमा The अक्©
लता जी मेरे साथ साथ कम से कम १२५ करोड़ भारतीयों, १५ करोड़ पाकिस्तानियों, ५-७ करोड़ बांग्लादेशियों, और श्रीलंका के अलाबा दुनिया भर के करोणों मनुष्यों का हृदय थीं… हमलोग न केवल उनकी आवाज़ से ही प्रेम करते हैं अपितु उनके गरिमापूर्ण स्वरूप पे अगाध श्रद्धा रखते हैं।
माना लता मंगेशकर कोई “अंतरराष्ट्रीय-ब्यूटीक्विन” नहीं थीं अपितु वह अति सामान्य रूप-रंग वाली भारतीय महिला थीं… परन्तु उनके साँवले-सरल रूप के आगे संसार भर की ब्यूटी-क्विन्स नतमस्तक हो जाती थीं क्यों कि उनकी देह पर उनको उज्ज्वल आत्मा की विलक्षण कीर्ति थी जिसके कारण वह मनुष्य से देवत्व को छू जाती थीं..।
मैं उन्हें जब पहली बार मिला तो इतना खो गया था कि कोई तस्वीर भी खींचू यह मेरे मन में न आया… तब उनके सेवक महेश (जिसे वो राखी भी बाँधती थीं) मेरा फोन ले कर कई चित्र यह कहते हुए खींच डाले कि “यह ऐतिहासिक पल है इसे याद रखना चाहिए!”… और उस पर इतिहास यह हुआ की लता जी ने अपने “फोटोग्राफीक्-हुनर” से पता नहीं कब बातों बातों में अपने “आई-फोन” से मेरी कई तस्वीरें खींच लीं… फिर बड़े प्यार से उषा मंगेशकर को दिखाते हुए बोलीं – “स्वामी जी की मुस्कान कितनी सुन्दर है जैसे मधुबाला! मुझे रहा नहीं गया मैंने इनकी फोटो उतार ली!”… यह बात मराठी में हो रही थी तो मैंने चौंक कर पूछा- “क्या आपने मेरी छवि उतारी अपने कैमरे में?… तो वह सकुचाई सी बोलीं – “जी! यूँ ही खींच ली, और एडिट भी कर दी, देखिये!”… उफ़्फ़! क्या चित्र था.. हर दृष्टिकोण से “पर्फेक्ट”… तब मैंने कहा – “दीदी! आज मैं धन्य हुआ! लोग आपके साथ तस्वीर को तरसते हैं, और अपने तो मेरी ही तस्वीर खींच ली वह भी इतनी सुंदर!”… तब वो बच्चों सी हँस कर बोलीं – “आप सुन्दर हैं! तो तस्वीर भी सुन्दर ही आई!”… मैं खिलखिला उठा.. और मैने कहा – “कोई इस बात पर भरोसा न करेगा! को लता जी ने मेरी तस्वीर अपने फोन में खींची! इस लिए अब आप इस फोन में मेरी तस्वीर के साथ एक तस्वीर खिंचवाने की कृपा करिये!”… यह सुन कर वो पहले तो खिलखिलाई, फिर झट से फोन ले कर एक पोज़ दे दिया जिसे मैंने क्लिक कर लिया…!
इस घटना के कुछ वर्ष् पश्चात एक बार वो बोलीं- “मुझे आजकल कहीं जाना पसन्द नहीं क्यों कि लोग तस्वीरें खींचते हैं, और स्वामी जी इधर बार बार बीमार होने से मैं दुबली हो रही हूँ तो मेरी तस्वीरें अच्छी नहीं आतीं, इस लिये मैं अवॉयड करती हूँ, मिलना जुलना या बाहर जाना!”… उस घड़ी मैं सोचने लगा ९० वर्ष् कि उम्र में भी “सौंदर्य” को लेकर इतनी “सचेष्ट” और जीवंत … यह किसी महान सौंदर्यबोध वाले मस्तिष्क से ही सम्भव है।
मेरा हृदय चीत्कार उठा और मस्तिष्क क्रोध से भर गया उस “नीच और कुत्सित” मन के “दुष्ट-व्यक्ति” के लिए जिसने ऐसे महान विभूति और विरल-सौंदर्य की मल्लिका के “व्याधिग्रस्त-शरीर” और कष्टपूर्ण समय में उनकी इच्छा के सर्वथा विपरीत बनाए वीडियो और चित्रों को उनके देहावसान के कुछ समय पश्चात ही संसार में प्रसारित कर रहा है। नहीं मालूम वह कोई घटिया-चिक्तिसक था अथवा कोई धूर्त-कुटुम्बी (क्यों कि अन्य कोई तो उन छणों में उनके पास हो नही सकता था) पर वह जो भी है उसे राक्षस ही कहा जा सकता है जो इतना असंवेदनशील और क्रूर हो। साथ ही मैं उन लोगो को भी उतना ही अपराधी मानता हूं जिन्होंने पिछले तीन-चार दिनों में उस वीडियो और चित्रों को वायरल कर “राष्ट्रपुत्री’ की छवि को दागदार किया है। वस्तुतः यह एक “क्रूर-अपराध” है कि इतने “सौंदर्यबोध और गरिमा” से भरे व्यक्तित्व का इस रूप में प्रचार किया जाए।
मैं आप सब देश वासियों से करबद्ध निवेदन करता हूँ कि उस “वीडियो” को जो दीदी की बीमारी में हस्पताल में उनकी अनिच्छा से ली गई है उसका सर्वथा बहिष्कार करें और उसे मिलते ही मिटा दें तथा भेजने वाले को उसकी “करतूत” पर खरी खरी सुनाए.. और यदि आप यह कुकृत्य कर चुके हैं तो उस देवी से छमा मांगें और लोगो से माफी के साथ उसे आगे न भेजने का निवेदन करें तभी आप पापमुक्त होंगे।
और हाँ यदि उस वीडियो को बनाने वाले “अधम” का पता लगे तो उस पर सामूहिक रूप से मानहानि और निजता के उलंघन का मुकदमा दायर करें।
मैं अत्यंत क्षोभ से भर कर यह लेख लिख रहा हूँ, आशा है आप सब इसे समझ सकेंगे।।
९ फ़रवरी २०२२

