मिसाल-ए-मऊ

न्याय की आस में भटकती रहे बीवियां, वतन पर मिटने वालों का क्या यही बाकी निशां होगा?

(लोकेश अवधराज सिंह)

साल 1993 में कारगिल का युद्ध हुआ, जिसमें मऊ के शहीद अक्षयबर राजभर वीरगति को प्राप्त हुए। राष्ट्र के प्रति उनके इस बलिदान के लिए पूरा देश व जनपद उनका सदा ऋणी रहेगा। पर इन शहीदों को श्रद्धांजलि के अलावा सरकार, जनता और प्रशासन के पास कुछ भी नहीं है इन्हे देने को। कम से कम इतना तो सुनिश्चित किया ही जाना चाहिए कि इनके परिवार वालों को किसी तरह कि असुविधा या समाज से किसी तरह कि हानि न पहुंचे। शहीद अक्षयबर कि पत्नी सुग्गी देवी आजकल जिला कलेक्ट्रट के चक्कर काट रही हैं वजह है उनके घर के आगे की सड़क पर दबंगो द्वारा अवैध निर्माण। सुग्गी देवी का कहना है कि महेश पुत्र हरदेव निवासी मुंशीपुरा द्वारा रस्ते का अतिक्रमण करते हुए निर्माण कार्य कराया जा रहा है। अवर अभियंता विनियमित क्षेत्र मऊ द्वारा मौके कि जाँच कर दिनांक 15.06.2020 को रास्ते को छोड़ कर निर्माण करने हेतु आदेश पारित किया गया था, परन्तु विपक्षी महेश ने बगैर रास्ता छोड़े स्थानीय पुलिस की शह पर जबरदस्ती निर्माण कार्य को करवाना जारी रखा। पुलिस अवर अभियंता के आदेश का पालन करने में अक्षम है। सुग्गी देवी ने जिलाधिकारी को लिखे पत्र में निर्माण कार्य को रोक कर निर्माण के विरुद्ध आरबीओ एक्ट की धरा 10 के तहत नोटिस निर्गत करने की अपील की है।
इस तरह के रास्ते पर किये गए अतिक्रमण के कई दृश्य हमें आम तौर पर शहर में देखने को मिल जाते हैं। जिससे सड़कें संकरी और दूभर हो गई है। किसी ने कुछ नहीं तो 5 फीट की सीढ़ी या रैंप ही सड़क पर निकाल दिया है। आये दिन रास्ते को लेकर होने वाली मार पीट की खबर भी आम है। क्या वजह है कि लोग एक इंच ही सही जमीन का अतिक्रमण करना स्वाभाविक प्रकृति मान बैठे हैं? वजह है प्रशासन और नगरपालिका का उदासीन रवैया। अब जब प्रकृति मान ही बैठे हैं तो सबका तो ठीक है। लड़ते झगड़ते जीवन काट ही लेंगे पर एक वीर की विधवा को इस तरह समाज में परेशानी हो, ये ठीक नहीं है।

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