चुनाव में अधिकारियों को देख लेने की धमकी देने के मामले में अब्बास की जमानत खारिज

० मुख्तार के छोटे पुत्र उमर अंसारी की भी अग्रिम जमानत अर्जी खारिज
मऊ। सदर विधायक व मुख्तार अंसारी के पुत्र अब्बास अंसारी का विधायक बनने से पहले जनता की अदालत में चुनावी जनसभा के दौरान मंच से अधिकारियों व कर्मचारियों को देख लेने की धमकी देने का मामला विधायक बनने के बाद कानून की अदालत में पेंचीदा होता जा रहा है। यहां कानून की अदालत में उन्हें राहत मिलने की उम्मीद कम होती दिख रही है। इस मामले में गुरूवार को मऊ के विशेष न्यायाधीश /एमपी एमएलए कोर्ट दिनेश कुमार चौरसिया ने विधानसभा चुनाव के दौरान मंच से अधिकारियों को धमकी देने और आचार संहिता का उल्लंघन के मामले में आरोपी वर्तमान में सदर विधायक अब्बास अंसारी व उनके छोटे भाई उमर अंसारी पुत्र गण पूर्व विधायक मुख्तार अंसारी की ओर से दाखिल की गई अग्रिम जमानत अर्जी को सुनवाई के बाद उसे खारिज कर दिया। विशेष न्यायाधीश ने यह आदेश बचाव पक्ष के अधिवक्ता दारोगा सिंह और एडीजीसी फौजदारी राणा प्रताप सिंह के तर्कों को सुनने तथा केस डायरी का अवलोकन करने के बाद पारित किया। बताते चलें कि मामला शहर कोतवाली क्षेत्र के 3 मार्च 2022 का है। विधानसभा चुनाव के दौरान सदर विधानसभा सीट से सुभासपा के प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ रहे मुख्तार अंसारी के पुत्र अब्बास अंसारी ने नगर क्षेत्र के पहाड़पुर मैदान में एक जनसभा के दौरान कहा कि जनपद मऊ के प्रशासन को चुनाव के बाद रोककर हिसाब किताब करने व इसके बाद सबक सिखाने की धमकी मंच से दी गई थी। जिसमें अभियोजन के अनुसार एसआई गंगाराम बिंद की तहरीर पर शहर कोतवाली में अपराध संख्या 97/ 22 धारा 506, 171च भादवि के तहत एफआईआर दर्ज हुई। इसमें सदर विधायक अब्बास अंसारी व अन्य को आरोपी बनाया गया। पुलिस ने विवेचना में मामले में धारा 506, 171 एफ, 186, 189, 153 ए, 120 बी भादवि मे आरोप पत्र कोर्ट में पेश किया। मामले में आरोपी सदर विधायक अब्बास अंसारी व उनके भाई उमर अंसारी की ओर से अलग-अलग अग्रिम जमानत के लिए अर्जी दी गई थी। जिसे सुनवाई के बाद विशेष न्यायाधीश एमपी/ एमएलए कोर्ट दिनेश कुमार चौरसिया ने खारिज कर दिया। न्यायाधीश ने अपने आदेश में लिखा कि आरोप पत्र न्यायालय आ चुका है, तथा अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट/ एमपीएमएलए द्वारा मामले का संज्ञान लिया जा चुका है। आरोपियों के विरुद्ध संमन निर्गत हो चुका है, गिरफ्तारी की कोई संभावना नहीं है। अग्रिम जमानत की अर्जी को खारिज कर दिया ।

