मऊ का बृजेश बना मुम्बई में फरिश्ता, खाना खिलाया तो रो पड़े भूखे बेघर
वैश्विक महामारी कोरोना से बचाने में मऊ का एक योद्धा मुम्बई में बेघर गरीबों के लिए फरिश्ता बन गया है। 21 दिन के लॉकडाउन में भूखे और बेघरों की बस्ती में जब खाना और राशन पहुंचाया तो 2 दिन से भूखे बेघर परिवार रो पड़े। संकट की घड़ी में उखड़ती सांसों को थामने वाले उस योद्धा का नाम है बृजेश आर्य।
कोरोना के रोकथाम के लिए सम्पूर्ण लॉक डाउन के बाद महाराष्ट्र सरकार ने सहूलियतों की घोषणा की थी। लेकिन मुम्बई में रहने वाले बेघरों तक कोई सुविधा नहीं पहुंची। ऐसे में तिरपाल में रखा मुट्ठी भर अनाज मुकद्दर से कबतक लड़ता। ऐसे विकट हालात में बृजेश और उनके साथियों ने लाखों बेघरों तक संदेश भिजवाया, कुछ भी हो जाए, अपने तिरपाल से बाहर मत निकलिए। उनके लिए राशन पानी का इंतजाम खुद करेंगे। उसके बाद बृजेश ने भूखे बेघरों को पहले खाना पहुंचाए अब राशन पानी पहुंचा रहे हैं।
बृजेश आर्य मऊ जिले के घोसी के रहने वाले हैं। जो एक दशक से मुम्बई में बेघरों को घर दिलाने की लड़ाई लड़ रहे हैं। काशी विद्यापीठ से पढ़ाई करने के बाद बेघरों के लिए उन्होंने अपना जीवन समर्पित कर दिया।
बृजेश ने बताया- ‘देश कोरोनो से बचने की निर्णायक लड़ाई लड़ रहा है। ऐसे समय में सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखते हुए बेघर और बेसहारों का हर सम्भव मदद करनी चाहिए। ये जिम्मेदारी उधार थी जिसे मैंने चुका दिया’। बृजेश ने अपील की है-‘ ये समय जज्बाती होने का नहीं है। जहां हैं वहीं बने रहने की आवश्यकता है ‘। वाकई में बृजेश जैसे लोग मनुष्यता को नई ऊंचाई दे रहे हैं।

