मार्ग मुक्ति का गढ़ना होगा!जीना है तो लड़ना होगा!!

गोरखपुर। स्त्री मुक्ति लीग और नौजवान भारत सभा की तरफ से राबिया की सामूहिक बलात्कार व बर्बर हत्या के खिलाफ ‘विरोध प्रदर्शन’ किया गया। स्त्री मुक्ति लीग की प्रतिभा ने कहा कि पिछले माह 27 अगस्त को संगम विहार, दिल्ली में रहने वाली 21 साल की साबिया उर्फ राबिया सैफी का फरीदाबाद में कुछ लोगों द्वारा सामूहिक बलात्कार कर बर्बरता के साथ हत्या कर दी गई। उसके शरीर पर चाकू से 50 बार वार किया गया। इस दिल दहला देनी वाली घटना को लगभग एक हफ़्ता होने को है, पर प्रशासन की ओर से अभी तक मात्र एक गिरफ़्तारी हुई है। ‘बेटी पढ़ाओ-बेटी बचाओ’ का दिखावटी नारा देने वाली केन्द्र सरकार राजधानी दिल्ली की लड़की के साथ हुई इस निर्मम घटना पर अब तक चुप्पी साधे हुए है। दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने इस घटना होने के 4 दिन बाद बस कुछ मुआवजे देने की बात की। इस भयंकर बर्बर घटना के सभी दोषियों को सख्त सज़ा दिलाने की माँग के बजाए सिर्फ़ मुआवजे की बात करना केजरीवाल सरकार का इस घटना के प्रति असंवेदनशीलता दर्शाता है। यह कोई पहली घटना नहीं है; देश की राजधानी से लेकर गाँव कस्बों तक में आये दिन महिलाओं के ख़िलाफ़ ऐसी बर्बर घटनाओं को अंजाम दिया जाता है। हमने निर्भया, गुड़िया के साथ हुई बर्बर घटनाओं को देखा था, आज राबिया हमारे बीच नहीं रही। स्त्रियों के खिलाफ़ बढ़ती दरिंदगी के पीछे आख़िर क्या कारण हैं ?आखिर कब तक निर्भया, गुड़िया, राबिया दरिन्दों के हाथों मारी जाती रहेंगी? कब तक हम एक के बाद एक ऐसी घटनाओं में मूक दर्शक बने रहेंगे? हमें इन घटनाओं के जड़ की पड़ताल करनी होगी, उसपर हमला करना होगा। हम एक ऐसे समाज में जी रहें हैं जहां एक तरफ तो स्त्री को देवी का दर्जा दिया गया है, किन्तु दूसरी तरफ गर्भ से लेकर बुढ़ापे तक हर दिन स्त्रियों को खौफ़ में बिताना पड़ता है। घर से लेकर बाहर तक महिलाओं को कमतर आँका जाता है, हमारे समाज के पोर-पोर में समायी पितृसत्तामक मानसिकता औरतों को पैर की जूती, भोग्या, पुरुष की दासी और बच्चा पैदा करने की मशीन समझती है। इसके साथ ही मुनाफ़ाखोर व्यवस्था ने हर चीज़ की तरह स्त्रियों को भी ख़रीदे-बेचे जा सकने वाले माल में तब्दील कर दिया है। स्त्री-विरोधी अपराधों को महज़ कुछ क़ानून बनाकर ख़त्म नहीं किया जा सकता, इसे जड़ से समाप्त करने के लिए एक लम्बी लड़ाई की ज़रूरत है। ये लड़ाई हजारों सालों से चले आ रहे पुरुष प्रधान सामाजिक ढाँचे और इस अमानवीय पूँजीवादी व्यवस्था को नेस्तानाबूद करके समानता और न्याय पर आधारित शोषण विहीन सामाजिक व आर्थिक ढाँचे के निर्माण करने की लड़ाई से जुड़ी है। इसलिए हमें दरिन्दों को पालने-पोसने वाली इस सामाजिक-आर्थिक ढाँचे को ख़त्म करने के लिए आगे आना ही होगा और ऐसी तमाम घटनाओं पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए सड़कों पर भी उतरना होगा। राबिया के साथ हुई इस घटना के निष्पक्ष जाँच के लिए हम उच्च स्तरीय जाँच कमेटी की माँग करते हैं। इसके लिए ज़िम्मेदार सभी दोषियों के लिए सख्त सज़ा की माँग करते हैं। अब तक की कार्यवाही में बरती गयी प्रशासनिक ढिलाई के लिए ज़िम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई की माँग करते हैं। विरोध प्रदर्शन में राजू, विकास, अंजली, माया, प्रभाकांत, राजकुमार, सूर्या आदि शामिल हुए।

