मिसाल-ए-मऊ

संघर्ष से स्वर्णिम सफलता तक: बिजली मिस्त्री के बेटे ने बीएचयू में रचा इतिहास

मऊ। सीमित संसाधन, कठिन परिस्थितियाँ और निरंतर संघर्ष—जब इन सबके बीच कोई युवा अपने सपनों को सच कर दिखाता है, तो उसकी कहानी केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं रहती, बल्कि लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन जाती है। ऐसी ही प्रेरक मिसाल बने हैं गौरव मिश्रा, जिन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के 105वें दीक्षांत समारोह (12 दिसंबर 2025) में MSc एवं MCA (कंप्यूटर साइंस) में दो स्वर्ण पदक प्राप्त कर यह सिद्ध कर दिया कि हालात कितने भी कठिन क्यों न हों, मेहनत और आत्मविश्वास का कोई विकल्प नहीं होता।

मऊ जिले के नगर क्षेत्र के निज़ामुद्दीन पुरा के डॉ. रामलाल राय की गली के एक साधारण परिवार से निकलकर गौरव ने असाधारण उपलब्धि हासिल की। वे स्वर्गीय पं. यमुना प्रसाद मिश्रा व स्व. शशिकला मिश्रा के पौत्र तथा पेशे से विद्युत तकनीशियन संतोष मिश्रा उर्फ “बबलू इलेक्ट्रीशियन” और माता मीना मिश्रा के सुपुत्र हैं। सीमित आय और कठिन परिस्थितियों के बावजूद माता-पिता ने अपने सपनों को पीछे रखकर बेटे की शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी।

गौरव की शुरुआती पढ़ाई आसान नहीं रही। पिता के साथ स्कूलों में इलेक्ट्रिक वायरिंग के कार्य के दौरान ही उनके भीतर पढ़ाई की ललक जागी। बेटे की इच्छा को समझते हुए संतोष मिश्रा ने उसी विद्यालय में मामूली वेतन पर नौकरी स्वीकार की, ताकि फीस में छूट मिल सके। यही त्याग, समर्पण और संघर्ष गौरव की सफलता की नींव बना।

आगे चलकर गौरव ने दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से BCA में पूरे विश्वविद्यालय में प्रथम स्थान प्राप्त कर गोल्ड मेडल जीता। इसके बाद CUET-PG परीक्षा उत्तीर्ण कर वर्ष 2023 में बीएचयू, बरक्षा कैंपस में MSc एवं MCA (कंप्यूटर साइंस) में प्रवेश लिया। यहाँ उन्होंने डेटा साइंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, डीप लर्निंग और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट जैसे आधुनिक क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।

पढ़ाई के साथ-साथ गौरव ने वेब डिजाइनिंग, वेब डेवलपमेंट और AI/ML आधारित प्रोजेक्ट्स पर कार्य कर अपने शैक्षणिक व व्यक्तिगत खर्च स्वयं वहन किए। उनकी मेहनत रंग लाई और कैंपस चयन के माध्यम से दिल्ली की एक प्रतिष्ठित सॉफ्टवेयर कंपनी में चयन हुआ। वर्तमान में वे नोएडा में सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, कोडिंग एवं AI-ML तकनीकों के क्षेत्र में कार्यरत हैं।

इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर डॉ. उदय नारायण सिंह, डॉ. अनिल राय, डॉ. सर्वानंद पांडे सहित अनेक शिक्षाविदों व समाज के गणमान्य लोगों ने गौरव मिश्रा एवं उनके पिता को शुभकामनाएँ दी हैं।

यह कहानी सिर्फ एक छात्र की सफलता नहीं, बल्कि उस पिता के संघर्ष, त्याग और विश्वास की जीत है, जिसने अंधेरों में भी अपने बेटे के सपनों की रोशनी बुझने नहीं दी। यह कहानी हर उस युवा के लिए संदेश है—

“परिस्थितियाँ नहीं, आपका संकल्प आपका भविष्य तय करता है।”

One thought on “संघर्ष से स्वर्णिम सफलता तक: बिजली मिस्त्री के बेटे ने बीएचयू में रचा इतिहास

  • Piyush gupta

    Lakshya prapti tak jo bhi sangharsh kare safalta usi ke kadam chumti hai
    Mishra ji ko bahut bahut badhai

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