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नाम धर्मकांटा काम, बेहद घाट

( श्रीराम जायसवाल )

मऊ। सड़क किनारे जगह-जगह ट्रक लोडिंग सामानों की तोल के लिए लगे धर्मकांटा के वजनों में कोई मानक स्थापित ना होने से लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। स्थिति यह है कि इन तोल सेंटरों के नाम तो धर्मकांटा रखे गए हैं। लेकिन इनका काम बेहद घटिया नजर आ रहा है। एक ही गाड़ियों के वजन अलग-अलग स्थानों पर कराए जाने पर 10 से 20 किलो नहीं बल्कि कुन्तलों के अंतर सामने आए। ऐसे में उपभोक्ता किस पर विश्वास करें किस पर नहीं यह समझ में नहीं आता।
खास बात यह कि बाट माप विभाग द्वारा छोटे दुकानदारों के यहां तो प्रायः तराजू व बाट माप के सील मोहर चेक करने व कार्रवाई करने की खबर आती है लेकिन इन धर्म कांटा वालों के ऊपर कभी कोई कार्रवाई की बात भी सामने नहीं आती। ऐसे में धर्म कांटा पर अलग-अलग वजन आने से लोग काफी परेशान नजर आ रहे हैं।
हालिया वाकिया के तहत गाड़ी संख्या CG29 AB 0118 जो छत्तीसगढ़ से मऊ आई थी। जिसका वजन मऊ जनपद के कोपागंज स्थित वैश्णवी धर्म कांटा व गणपति धर्म कांटा पर कराए जाने पर एक ही गाड़ी के वजन में 2 कुंतल से अधिक का अंतर आया। रविवार की दोपहर भारी गाड़ी का वजन जाम वैष्णवी धर्म कांटा में 47260kg आया वही श्री गणपति कंप्यूटर धर्म कांटा में 47060kg आया। उसके बाद गाड़ी खाली होने के बाद नेट वेट वैश्णवी धर्म कांटा 34175kg आया वही श्री गणपति कंप्यूटर में 33990kg आया। विशेष बात है कि वही गाड़ी जब नवराग धर्म कांटा इंडस्ट्रियल एरिया ताजोपुर में कराया गया तो भारी गाड़ी 46970kg व नेट वजन 33920kg आया ऐसे में उपभोक्ता किन कांटा पर विश्वास करें किन पर नहीं यह यक्ष प्रश्न बना हुआ है। ऐसे में व्यापारियों ने बाट माप विभाग से गुहार लगाई है किन धर्मकांटा के वजन व मानक एक बराबर तय कर दिए जाएं।
बाट माप की लापरवाही के चलते वाहन चालकों पर लगते हैं चोरी के आरोप, खरीदारों व ट्रक ड्राइवरों में आए दिन होती है किचकिच, इस तरह से अलग-अलग धर्मकांटा पर अलग-अलग वजन आने से एक तरफ जहां बाट माप विभाग की लापरवाही उजागर हो रही है। वही वजन एक नहीं बैठने से ट्रक अनलोड कराने वाले माल के स्वामियों व ट्रक ड्राइवरों में प्रायः माल की चोरी व वजन कमी होने का आरोप लगते हुए झगड़ा होता रहता है। एक तरफ जहां ट्रक ड्राइवर द्वारा कहा जाता है कि उसने जितना माल पाया उतना ही दे रहा है। वहीं धर्म कांटा के पर्ची के आधार पर अनलोड कराने वाले मुनीब/व्यापारी द्वारा वजन कम दिखाकर भाड़ा काटने का काम किया जाता है। जिससे विवाद की स्थिति बनी रहती है।

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