मोख्तार का पर्चा दाखिला न करने का कारण!अखिलेश की मनाही या MP-MLA कोर्ट का डर!

@ आनन्द कुमार… मऊ के सदर विधायक मोख्तार अंसारी मऊ से चुनाव नहीं लड़ेंगे और उनके ऐन वक्त पर चुनाव न लड़ने के उनके बेटे की घोषणा ने मऊ से लेकर पूरे पूर्वांचल में उनके चुनाव न लड़ने के फैसले पर सियासी पारा गर्म कर दिया है। लोग उनके चुनाव न लड़ने के निहितार्थ ढूढने लगे हैं कि आखिर ऐसा क्या हो गया कि अचानक पांच बार से विधायक होने का इतिहास बनाने वाले मोख्तार अंसारी अपनी राजनैतिक विरासत अपने बड़े पुत्र अब्बास अंसारी को सौंप रहे हैं।
खैर अंसारी परिवार में इस मन परिवर्तन के पीछे बहुत सी ऐसी बात है जो धीरे-धीरे चर्चा ए दौर में लोगों के बीच कानाफूसी होने लगी है। और सूत्रों और वजह पर विश्वास करें तो यह बातें सामने आ रही हैं जो बिन्दुवार इस प्रकार है।
सपा मुखिया अखिलेश यादव ने गठबंधन का प्रत्याशी बनाने से मोख्तार को किया इंकार : सूत्र
पहली बात यह है कि मोख्तार अंसारी को समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने सुभासपा (गठबंधन दल) का प्रत्याशी बनाने में अपनी असमर्थता जताई है। इसके पीछे वजह उनकी बाहुबली व दागदार छवि है जिसको लेकर अखिलेश यादव उन्हें पसंद नहीं करते हैं। अगर यह बात सच है तो ऐसा कर अखिलेश यादव अपने पार्टी के स्लोगन नई सपा, नई हवा को चरितार्थ कर रहे हैं। जबकि सुभासपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने मोख्तार अंसारी से जेल में मुलाकात कर उनके पक्ष में अपनी हर बात कही थी। अब जब मोख्तार के बेटे अब्बास ने मऊ सदर से नामांकन कर दिया है तो न सपा मुखिया अखिलेश यादव की तरफ से कोई प्रतिक्रिया आई और न सुभासपा मुखिया ओमप्रकाश की तरफ से। हां अब्बास अंसारी ने यह जरूर कहा, बाप-बेटे में फर्क क्या है।
एमपी-एमएलए कोर्ट का फैसला भी हो सकता है एक कारण…
दूसरे पहलू पर विचार करें तो सदर विधायक मोख्तार अंसारी का मामला एमपी एमएलए कोर्ट में चल रहा है, उसमें कभी भी फैसला आ सकता है, जिसको लेकर यह डर है कि अगर 2022 का चुनाव, मोख्तार अंसारी अगर स्वयं लड़ते हैं और जीत जाते हैं और न्यायालय का फैसला उनके खिलाफ आ जाएगा तो उनकी विधायकी चली जाएगी, ऐसे में वे पुन: उपचुनाव की वैतरणी का खतरा बिल्कुल मोल नहीं लेना चाहते।
बेटे को राजनैतिक विरासत सौंपने का सही समय…
तीसरे पहलू की बात करें तो अब तक मऊ में लड़े कुल चुनाव में एक बार लोकसभा में मोख्तार अंसारी की स्वयं हार और 2017 में बेटे अब्बास अंसारी की पहला चुनाव, घोसी विधानसभा से शानदार प्रदर्शन के बाद भी मात्र 7003 वोट से हार का सामना करना पड़ा था। इसके अलावा मोख्तार अंसारी पांच बार से लगातार मऊ से विधायक होते आए रहे हैं। मोख्तार अंसारी के समर्थक इस बार 2022 के विधानसभा चुनाव को लेकर काफी उत्साह में हैं कि इस बार अंसारी परिवार इस सीट पर इतिहास बनाएगा। तो आशंका है कि मोख्तार के चुनाव न लड़ने में एक वजह यह भी हो सकता है कि वे बेटे अब्बास अंसारी की राजनीति में शानदार इन्ट्री सदन भेज करना चाहते हैं। जबकि अंसारी परिवार घोसी से टिकट के लिए भी काफी कोशिश की लेकिन उनकी वहां दाल न गली।
कुछ भी संभव है…
फिर भी अभी नामांकन का वक्त शेष है, और कब कौन कहां से नामांकन कर दे इस विषय में कुछ भी कहा नहीं जा सकता है। वैसे तो अब्बास ने यह कह कर कि बाप बेटे में फर्क क्या है स्पष्ट संदेश दे ही दिया है, लेकिन जब तक नामांकन का समय बीत न जाए तब तो कुछ भी नहीं कहा जा सकता। ऐसे में मऊ के सियासत में अंसारी फैमिली उनके समर्थक और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी भले ही छड़ी के सहारे सदन जाने की तैयारी में लगी है लेकिन विपक्षी बहुजन समाज पार्टी और भारतीय जनता पार्टी उनसे राजनीतिक दो-दो हाथ करने के लिए पूरी तैयारी कर कर बैठे हैं। अब देखना होगा कि जनता किसे मऊ सदर का रहनुमा चुनती है। वैसे मोख्तार के चुनाव न लड़ने के फैसले पर अखिलेश यादव की नाराजगी काफी मायने रखती है और यह मोख्तार के लिए शुभ संकेत नहीं है।

