साल में एक दिन खुलने वाला छत्तीसगढ़ का रहस्यमयी धाम लिंगेश्वरी माता मंदिर
✍️ प्रमोद कुमार तिवारी…
छत्तीसगढ़ का बस्तर अंचल न केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता और जन- जातीय परंपराओं के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यहां की धार्मिक विरासत भी उतनी ही अद्वितीय है। ऐसा ही एक अलौकिक स्थल है लिंगेश्वरी माता मंदिर, जो कोंडागांव जिले के फरसगांव ब्लॉक के अंतर्गत झाटीवन आलोर की पहाड़ियों में स्थित है। यह मंदिर हर वर्ष केवल एक दिन के लिए श्रद्धालुओं के दर्शन हेतु अपने कपाट खोलता है, जो इसे अत्यंत रहस्यमय और विशेष बनाता है। इस वर्ष 3 सितंबर, बुधवार को खुलेंगे कपाट मना जाता है कि भाद्रपद मास की शुक्ल नवमी के बाद आने वाले प्रथम बुधवार को मंदिर के कपाट खोले जाते हैं।

इस दिन यहां हजारों की संख्या में श्रद्धालु दूर-दराज़ से पहुंचते हैं। यह आयोजन भक्ति, रहस्य और परंपरा का ऐसा संगम बनाता है, जो बस्तर की सांस्कृतिक चेतना को जीवंत रूप में प्रस्तुत करता है। यह मंदिर विशेष रूप से इसलिए भी अद्वितीय है क्योंकि यहां शिव को स्त्रीलिंग रूप में, यानी माता स्वरूप में पूजा जाता है। लिंगेश्वरी माता, श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र हैं और विशेषकर संतान प्राप्ति की कामना करने वाले दंपतियों की आस्था का प्रमुख स्थान हैं। यहां दंपति माता जी को खीरे का प्रसाद अर्पित करते हैं, और वहीं प्रसाद ग्रहण कर संतान प्राप्ति की कामना करते हैं। मंदिर की एक और विलक्षण परंपरा जो अद्भुत है रेत में भविष्यवाणी। हर वर्ष पूजा के उपरांत गुफा में रेत बिछाई जाती है। जब अगले वर्ष कपाट पुनः खोले जाते हैं, तो उस रेत में उभरे पशु-पदचिह्नों के माध्यम से आने वाले वर्ष की सामाजिक स्थिति और प्राकृतिक संकेतों का अनुमान लगाया जाता है। यह परंपरा लोक आस्था और प्रकृति के रहस्यमयी संबंध का सजीव उदाहरण है।
मेरा व्यक्तिगत अनुभव आस्था और सौभाग्य का संगम नवंबर 2024 में मुझे भी इस दिव्य धाम के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ। मेरे मित्रवत बड़े भाई शिव शंकर जी के सहयोग से मैं पहाड़ी की कठिन चढ़ाई पार कर माता जी के दरबार तक पहुंचा। वहाँ के वातावरण की ऊर्जा और माताजी के मंदिर का वाह्य स्वरूप की दिव्यता ने मन को असीम शांति से भर दिया। इस स्थल की पवित्रता से मुझे मेरे अनुज जितेंद्र झा और उनके पिताश्री ने अवगत कराया था, जिनका मैं हृदय से आभार प्रकट करता हूँ। उनके द्वारा साझा की गई सूक्ष्म जानकारियों को ही मैं आज आप सभी श्रद्धालुओं के समक्ष प्रस्तुत कर रहा हूँ। इस एकदिवसीय आयोजन की सफलता में स्थानीय समाज, युवा मंडल और ग्राम पंचायत की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि सामुदायिक समर्पण और लोकपरंपरा की मिसाल भी है। लिंगेश्वरी माता मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि रहस्य, श्रद्धा और सांस्कृतिक परंपरा का दुर्लभ संगम है। इसकी विशेषता इसे देश के अनूठे धार्मिक स्थलों में स्थान दिलाती है। यदि आप भी जीवन में कभी इस रहस्यमयी गुफा मंदिर के दर्शन का संयोग प्राप्त करें, तो निश्चय ही यह यात्रा आपको एक नई आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देगी।

