खरवार समाज के लोगों को दिल्ली में नहीं मिल रहा जाति प्रमाण पत्र, यूपी में भी भेदभावः विपिन
(आनन्द कुमार)
दिल्ली। अखिल भारतीय खरवार महासभा दिल्ली प्रदेश के प्रवक्ता विपिन खरवार ने खरवार समाज के लोगों के प्रति दिल्ली के शासन व प्रशासन द्वारा बरती जा रही अनदेखी के प्रति रोष प्रकट किया है। कहा कि एक देश में एक विधान होना चाहिए लेकिन एक देश व कई विधान का यह परम्परा ठीक नहीं है। दिल्ली के साथ साथ उन्होंने यूपी सरकार को भी कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश के 4 जनपदों बलिया, गाजीपुर, मिर्जापुर व सोनभद्र में खरवार जाति को आदिवासी खरवार बताकर अनुसूचित जनजाति का सर्टिफिकेट दिया जाता है, जबकि इसी सरकार द्वारा इसी प्रदेश के अन्य जिलों में खरवार जाति को अनुसूचित जाति की श्रेणी में रखा गया है। लेकिन उनका भी जाति का प्रमाण पत्र नहीं बनाया जा रहा है आरटीआई से यह पता चला है कि उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों में खरवार जाति के लोग अनुसूचित जाति में हैं।
श्री खरवार ने कहा कि दिल्ली में लगभग 10 वर्षों से लेकर 40 वर्षों से हजारों की संख्या में खरवार समाज के लोग रहते हैं जिनको अपनी जाति प्रमाण पत्र बनवाने में बहुत ही मशक्कत करनी पड़ती है। खरवार जाति का जाति प्रमाण पत्र, जिनका गांव में बना हुआ है उनका तो 100 में से एक अदद किसी का बना देते हैं बाकी लोग परेशान होकर सिर्फ चक्कर लगाते हैं। इन समस्याओं को देखते स्वयं विपिन खरवार ने अपना जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए दिल्ली के राजौरी गार्डन में एसडीएम कार्यालय में आवेदन किया। लेकिन बिना कारण बताए तीन बार जाति प्रमाण पत्र को निरस्त कर दिया गया और जब पता किए तो बताए कि दिल्ली में खरवार जाति ही नहीं है लेकिन दिल्ली सरकार के पोर्टल पर अगर खरवार जाति का सर्टिफिकेट बनवाने के लिए अप्लाई करेंगे तो वह पोर्टल पूछता है आप कहां के रहने वाले हैं उसके मुताबिक मैंने सभी अपनी डिटेल सही-सही भर दिया लेकिन तहसीलदार द्वारा ना ही दिल्ली के जो मेरे पता दिया हुआ है उस पर कोई जांच पड़ताल किया गया ना ही मेरी जन्मभूमि ग्राम कसारा जिला मऊ उत्तर प्रदेश में तहसीलदार आदि सेे इस बावत कोई कागजी कार्रवाई की गई। बिना कोई जांच पड़ताल किए बिना निरस्त कर दिया गया। शासन व प्रशासन की इन्हीं गलत नीतियों से समाज के लोग परेशान होने को मजबूूूर हैं। इन सब समस्या को देखते हुए विपिन खरवार ने दिल्ली की अदालत राजौरी गार्डन में केस दायर किया है। और time Bond delivery act 2011के अंतर्गत किसी भी सरकारी कर्मचारी को 15 दिन के अंदर जवाब दिया जाता है। लेकिन तहसीलदार द्वारा कोई भी कार्यवाही नहीं की गई। इन लोगों ने मेरे को 20 जुलाई को डीएम कोर्ट में बुलाया डीएम ने तहसीलदार से जवाब मांगा तहसीलदार के पास कोई जवाब ही नहीं था इसलिए अभी तक डीएम साहब के तरफ से कोई जजमेंट नहीं आयी है। तहसीलदार ने ना ही कोई जांच-पड़ताल किया और ना ही पटवारी से कोई जांच-पड़ताल करवाई, इनको इस लापरवाही के चलते मैं दिल्ली हाई कोर्ट में भी केस दाखिल करूंगा। दिल्ली में हजारों की संख्या में खरवार समाज के लोग रहते हैं। सभी को उनका हक व अधिकार दिलाने के लिये मैं खरवार समाज की लड़ाई लड़ता रहूंगा। जब तक इनको इनका हक ना मिले।






