पुण्य स्मरण

अमर तो अमर थे…

(कबीर दादा)


भारत की आम जनता भले ही अमर सिंह की ऋणी न हो। पर अमिताभ बच्चन, मुलायम सिंह, अखिलेश ,सपा और कॉंग्रेस जरूर उनके ऋणी हैं। यह व्यक्ति 1995 के बाद की भारतीय राजनीति का वो जादूगर था जिसने सिनेमा, क्रिकेट, राजनीति और मीडिया को आपस में मिलाकर पॉलटिक्स को एक अलग ही किस्म का कॉकटेल बना दिया था। ग्लैमर को राजनीति में लाने वाले वो अकेले शख़्श थे।इसीलिए जब भी उन्होनें कहा कि ‘मेरा मुँह मत खोलवाईये’ तो फिर किसी ने दुबारा पलटकर उनसे सवाल नहीं किया। क्योंकि सबको पता था ये इंसान हमाम के हमराहियों को इस क़दर जानता है कि मुँह खोला तो कोई नही बचेगा।

अखिलेश और डिंपल की शादी में इस इंसान की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इस इंसान की भूमिका अमिताभ को फिर से खड़ा करने में भी रही। और 2008 में वाम के समर्थन लेने के बाद कॉंग्रेस को जीवनदान देने में भी।( ये अलग बात है कि उसी कांग्रेस ने आगे जाकर पी चिदम्बरम के जरिए उन्हें तिहाड़ जेल भेजने में कोई कसर नही छोड़ी। ) सपा आज बसपा से बेहतर स्थिति में है इसके लिए अमर सिंह का ही अतीत में किया योगदान है। अमिताभ अपनी दूसरी पारी इसी अकेले इंसान की मदद से खेल पाए। छोटे अंबानी भी इनके कर्जदार हैं। सुब्रत सहारा भी। जया प्रदा भी। अंतिम दिनों में भाजपा को भी अपना मुरीद बना गया यह व्यक्ति।इंडिया की न्यूक्लियर डील कराने वाले अमर सिंह ही थे। टर्न अराउण्ड टाइमिंग और नेटवर्किंग का इससे बड़ा किंग शायद ही इंडियन पॉलिटिक्स में दूसरा कोई हुआ हो।

फिर भी जीवन के अंतिम दिनों में इस इंसान ने जिस-जिस की मदद की। उसमें से एक भी इंसान इसके साथ नहीं खड़ा था। मानवीय संबंधों की यही त्रासदी है। इस शख़्श के जाने के साथ ही दुनिया -जहान के कई राज भी दफ़न हो गए उसके साथ। शत शत नमन

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