आस्था

मऊ में धूमधाम से मनाई गई झूलेलाल जयंती महोत्सव

मऊ। चैत्र नवरात्रि व भारतीय नववर्ष के शुभ दिन ही सिंधी समाज के इष्ट देव भगवान श्री झूलेलाल साई जी की जयंती बड़े ही धूमधाम से समस्त मऊ सिंधी समाज द्वारा सिंधी कॉलोनी स्थित सिंधी गुरुद्वारा के पास जयंती समारोह हर्सोल्लास व गाजे- बाजे के साथ मनाया गया ।
इस जयंती समारोह का आयोजन सिंधी नवयुवक झूलेलाल सेवा समिति के द्वारा किया गया। भगवान झूलेलाल जी की पूजा-अर्चन व विधि पूर्वक भोग आरती करने के पश्चात समिति द्वारा प्रसाद के कई तरह के स्टाल लगाकर लोगो को प्रसाद व शर्बत वितरित किया गया।
नवरात्रि के व्रत वाले लोगो के लिए अलग से फलहार का भी स्टाल लगाया गया।
झूलेलाल साई को जल के देवता, के नाम से भी पुकारा जाता हैं। इस जयंती समारोह में समाज की सभी छोटी बड़ी महिलाये घर से दिया व प्रसाद बना कर अपने इष्टदेव के सम्मुख दीया जला के प्रसाद का भोग भी लगाया ।
“आयोलाल झूलेलाल” के मधुर गीतों व सिंधी गानों पे सभी ने डांडिया डांस भी किया । कार्यक्रम के अंत मे कलश, व महाज्योत को विसर्जन हेतु गाजे बाजे के साथ इष्टदेव के गीत गाते हुए फाटक के रास्ते होते हुए भीटी तमसा नदी के पावन तट पे जाकर कलश व महाज्योत को पूरे विधि विधान से विसर्जित किया गया। रास्ते मे भी कई जगह पे जलपान की व्यवस्था की गई थी। अंत मे सर्व समाज की सलामती के लिए विशेष रूप से झोली फैला कर ( पल्लव) के रूप में भगवान झूलेलाल से प्रार्थना की गई कि सभी की समस्या का निदान हो।

भारत भर में विभिन्न धर्म, समुदाय और जातियों का समावेश है इसलिए यहां अनेकता में एकता के दर्शन होते हैं। यह हमारे लिए गर्व की बात है कि यहां सभी धर्मों के त्योहारों को प्रमुखता से मनाया जाता है, चाहे दिवाली हो, ईद या फिर क्रिसमस या फिर भगवान झूलेलाल जयंती।

बताते चलें की सिंधी समुदाय का त्योहार भगवान झूलेलाल का जन्मोत्सव ‘चेटीचंड’ के रूप में पूरे देश में हर्षोल्लास से मनाया जाता है। इस त्योहार से जुड़ी हुई वैसे तो कई किवंदतियां हैं परंतु प्रमुख यह है कि चूंकि सिंधी समुदाय व्यापारिक वर्ग रहा है सो ये व्यापार के लिए जब जलमार्ग से गुजरते थे तो कई विपदाओं का सामना करना पड़ता था।
जैसे समुद्री तूफान, जीव-जंतु, चट्‍टानें व समुद्री दस्यु गिरोह जो लूटपाट मचा कर व्यापारियों का सारा माल लूट लेते थे। इसलिए इनके यात्रा के लिए जाते समय ही महिलाएं वरुण देवता की स्तुति करती थीं व तरह-तरह की मन्नते मांगती थीं। चूंकि भगवान झूलेलाल जल के देवता हैं अत: यह सिंधी लोग के आराध्य देव माने जाते हैं। जब पुरुष वर्ग सकुशल घर लौट आता था तब चेटीचंड को उत्सव के रूप में मनाया जाता था। मन्नतें मांगी जाती थी और भंडारा किया जाता था।

इस कार्यक्रम को सफल बनाने में समाज के बड़े बुजुर्गों के साथ ही साथ पुलिस प्रशासन का भी विशेष सहयोग रहा ।
इस जयंती समारोह में मुख्य रूप से अशोक रतवानी, सेवक तानवानी, मोहन लाल जी, अशोक तानवानी, किशन चंद, दिलीप रतवानी, जितेंद्र खुशवानी, नरेश, राजेश, कमलेश तानवानी, राकेश तानवानी, रोशन लाल, मनोज कुमार, रवि कुमार, मुकेश जी, महेश कुमार, कमला देवी, पार्वती देवी, सुशीला देवी, लाजवंती देवी, मोहिनी देवी, धनी देवी, व खुशी, कुणाल, पीयूष, एंजेल, पाखी, गौरव, सोनू व समाज के सभी छोटो बड़ो ने काफी बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया।

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