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15 मार्च को होगा किसानों का जमघट, वैज्ञानिकों से सीखेंगे किसान खेती का गुर

मऊ। जनपद के कुशमौर स्थित भारतीय बीज विज्ञान संस्थान में 15 मार्च को एक दिवसीय किसान मेला का आयोजन किया जाएगा। जिसमें लगभग 6 हजार किसान प्रतिभाग करेगें। उक्त बातें भारतीय बीज विज्ञान संस्थान के निदेशक डा. संजय कुमार ने कही। श्री कुमार ने बताया कि किसान मेला में किसानों को नई तकनीक के बारे में जानकारी देना ही प्रमुख लक्ष्य है‌। उन्होंने कहा कि किसान खेतों में सही बीज के द्वारा ही खुशहाली व समृद्धि ला सकते हैं। कहा कि कृषक भागीदारी के तहत संस्थान किसान के साथ मिलकर उनके खेत पर बीज का उत्पादन करती है, और फिर उसे संस्थान ले लेती है। ऐसे में किसान अपने उत्पाद पर 30 से 40 प्रतिशत तक अधिक लाभ कमाते हैं। 

उन्होंने बताया कि इस संस्थान का मुख्य उद्देश्य गुणवत्तायुक्त बीजों का उत्पादन करना और देश की 65 संस्थाओं सहित विश्वविद्यालयों की सहायता से प्रजनन बीज का उत्पादन कराना हैं। इसी सम्बध में किसानों को बीज उत्पादन और गुणवत्ता की जानकारी के लिए संस्थान के परिसर में 15 मार्च को एक दिवसीय किसान मेले का आयोजन किया जा रहा है। बताया कि इस मेले में सब्जी अनुसंधान संस्थान वाराणसी, दलहन अनुसंधान संस्थान कानपुर सहित जिले और प्रदेश के सरकारी और गैर सरकारी संस्थानों की सहभागिता रहेगी। जबकि 30 अन्य संस्थानों द्वारा मेले में स्टाल लगाया जाएगा। जिसमें बैंकों के अधिकारी भी रहेंगे जो अपने स्टाल पर किसानों बैंक से सम्बंधित जानकारी देंगे। साथ ही वैज्ञानिकों द्वारा किसानों को कृषि से और बीच की गुणवत्ता पर तकनीकी जानकारी दी जाएगी। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्व महानिदेशक व डेयर के पूर्व सचिव डॉ मंगला राय रहेंगे। उन्होंने बताया कि अनुसूचित जाति उपयोजना के तहत भारत सरकार द्वारा एक स्किम चलाई जाती है जिसमें किसानों को बीज के अलावा अन्य जरूरत की चीज दिए जाते हैं। जिसमें 500 किसानों को प्रति एकड़ के हिसाब से मूंग का बीज दिया जाएगा।

प्रेसवार्ता के दौरान संस्थान के वैज्ञानिक व कीट विज्ञान विशेषज्ञ डा. अरविंद नाथ सिंह ने बताया कि कृषक की आय बढ़ाने में बीज का महत्वपूर्ण योगदान होता है। गुणवत्ता युक्त बीज द्वारा किसान सिर्फ अच्छी फसल ही नहीं उगा सकते बल्कि समृद्ध हो सकते हैं और अपने आय में बढ़ोतरी कर सकते हैं। पूर्वांचल के किसान घर के संरक्षित बीज का उपयोग करते हैं जो ठीक नहीं है। उन्हें ऐसे शोध किए गए बीजों से अपनी खेती को करना चाहिए जिससे उनको काफी लाभ मिलेगा।

इस अवसर पर बीज विज्ञान प्रौद्योगिकी वैज्ञानिक डा. कल्याणी कुमारी, व जैव प्रौद्योगिकी वैज्ञानिक डा. कुलदीप जायसवाल मौजूद रहे।

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