फटे जूते वाला

@ शब्द मसीहा केदारनाथ…

“अरे देखो तो कैसा दानी बना फिरता है, हर रोज बीबी के साथ न जाने किन लोगों के लिए खाना बनाकर बांटने जाता है। पैरों में ढंग के जूते नहीं, और चले हैं महान बनने के लिए। ” सुनीता के ये शब्द उसके कानों में पिघले हुए शीशे की तरह चुभ रहे थे, जब उसने अर्थी के साथ उनकी पत्नी को और लोगों की भीड़ को देखा था ।

“ये गाड़ी दूसरे रास्ते से निकाल लो , न जाने कौन मरा है….इतने गरीब से लोग किसी की अर्थी के साथ पहली बार देखे हैं।” पत्नी सुनीता ने कहा।

“नहीं, मैं चार कदम इसके साथ जरूर चलूँगा ।” पति कहते हुए गाड़ी से बाहर निकल पड़ा । कुछ देर बाद उदास सा वापिस लौटा ।

“कौन था ? क्या कोई जानने वाला था ? कोई नेता था क्या ?” पत्नी ने पूछा।

“देखने में तो पाँच फुटा ही था…. पर कितने पाँच फुटे जोड़ रखे थे, ये आज पता चला । अर्थियों में भीड़ पैसे से नहीं प्यार से आती है …. अपनी सोसाइटी का फटे जूते वाला था ।”

पत्नी का दमकता चेहरा एकाएक बुझ गया था।

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