वैज्ञानिकों ने किसानों को त्वरित कम्पोस्टिंग एवं कृषि में सूक्ष्मजीव आधारित अनुकल्पों का बताया तरीका

मऊ। राष्ट्रीय कृषि उपयोगी सूक्ष्मजीव ब्यूरो में पांच दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यशाला के तीसरे दिन
त्वरित कम्पोस्टिंग वर्तमान में कृषि अवशेष, जो मूलतः समस्या बनते चले जा रहे हैं, के प्रबंधन के लिए किसानों के हाथों में एक उत्तम हथियार है. इस प्रक्रिया में कृषि अवशेषों को दो माह के भीतर ही पूर्ण रूप से कम्पोस्ट खाद में बदल कर किसान अपने खेतों से फसलों द्वारा खींचे जा रहे पोषक तत्वों को बहुत हद तक लौटा सकता हैं. साथ ही मिट्टी में कार्बन की मात्रा बढ़ने से उसकी जैविक ताकत में वृद्धि कई गुना बढ़ोत्तरी होती है और फसल उत्पादन बेहतर हो सकता है. साथ ही ऐसी मिट्टी जिसमें कार्बन तत्वों की अधिक मात्रा होती है, मिट्टी की जल धारण क्षमता और वायु संचरण को भी बढाते हैं जिससे मृदा स्वास्थ्य को बढ़ावा मिलता हैः


राष्ट्रीय कृषि उपयोगी सूक्ष्मजीव ब्यूरो में चल रही पांच दिवसीय डीबीटी बायोटेक किसान कार्यशाला के तीसरे दिन किसानों एवं कृषि उद्यमियों को कृषि अपशिष्टों से उच्च गुणवत्ता युक्त कम्पोस्ट तैयार करने की विधियों पर प्रकाश डाला गया और उन्हें प्रायोगिक अनुभवों से अवगत करा गया। परियोजना प्रभारी डॉ रेनू ने बताया कि मिट्टी के जैविक एवं रासायनिक स्वास्थ्य के लिए कार्बनिक खाद वरदान है और चूँकि पशुधन के अभाव के चलते कम्पोस्ट की उपलब्धता कम हो गयी है, इसलिए किसान अपने घरों के आस पास उपलब्ध और खेतों से निकालने वाले अवशेषों को त्वरित कम्पोस्टिंग प्रक्रिया के माध्यम से खाद में बदल सकता है। प्रयोगशाला में कम्पोस्ट प्रक्रिया को प्रभावित बैक्टीरिया एवं फफूंदों को कल्चर मीडिया पर उगाकर और रोपित करके दिखाया गया। डॉ. रेनू के अनुसार प्रशिक्षुओं को सूक्ष्मजीव के माध्यम से कम्पोस्ट फोर्टीफीकेसन के द्वारा गुणवत्ता संवर्धन पर भी विस्तार से जानकारी दी गयी। वैज्ञानिक डॉ हिल्लोल चकदर ने सूक्ष्म जीव की मदद से पौधों में पोषक प्रबंधन के विषय में विस्तार से किसानों को बताया। साथ ही सुक्ष्मजीव आधारित विभिन्न अनुकल्पों को खेती में प्रोयोग के तरीके बताये. किसानों को सजीव रूप में बीज शोधन, जड़ शोधन एवं मिटटी शोधन करके दिखाया गया।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में डॉ मागेश्वरन, डॉ ज्योति प्रकाश, आशीष, राजन, अमित, आस्था, विनीत सहित अनेकों कृषक आदि ने भाग लिया।




