डेंगू की “एलाईजा” जाँच रिपोर्ट से होती है पुष्टि, जाँच मऊ सदर अस्पताल में है निःशुल्क

■ लगातार तेज बुखार हो तो जाँच जरूर कराएँ : सीएमओ. ■ जनपद स्तरीय रैपिड रेस्पान्स टीम द्वारा निरन्तर निगरानी, घर के आस-पास रखें साफ-सफाई, करें मच्छरदानी का प्रयोग

मऊ। डेंगू एडीज मच्छर के काटने से होता है। इस मच्छर के काटने के 5 से 6 दिन बाद डेंगू के लक्षण दिखाई देने लग जाते हैं। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ श्याम नरायन दुबे ने बताया – डेंगू के गंभीर लक्षणों में हड्डियों का दर्द शामिल है, इसी वजह से डेंगू बुखार को ‘हड्डी तोड़ बुखार’ के नाम से भी जाना जाता है | डेंगू खासतौर पर बारिश के मौसम में होता है, क्योंकि इसी दौरान एडीज मच्छरों को पनपने के लिए जगह-जगह जमा हुआ भरपूर पानी मिलता है।

घर-घर भ्रमण अभियान के जिला अन्तर्विभागीय समन्वय समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए जिलाधिकारी ने बताया कि नगर व ग्रामीण क्षेत्रों में साफ-सफाई, सोर्स रिडक्शन, लार्वीसाइड छिड़काव व फागिंग नियमित रूप से करायी जाये।

सीएमओ डॉ श्याम नरायन दुबे ने डेंगू से बचाव के उपाए के बारे में बताया कि डेंगू एडीज मच्छर के काटने से होता है जो दिन के समय काटता है। इसलिए दिन में भी मच्छरों से बचाने की क्रीम लगाकर रखें। शरीर को ढक कर रखें। सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें, कूलर, गमले और टायर आदि में पानी एकत्र न होने दें। पानी की टंकियों को सही तरीके से ढंक कर रखें। खिड़की और दरवाजों में जाली लगवाएं। घर के अंदर और आस-पास सफाई रखें। डेंगू के लक्षणों में त्वचा पर चकत्ते, तेज सिर दर्द, पीठ दर्द, आंखों में दर्द, तेज़ बुखार, मसूड़ों से खून बहना, नाक से खून बहना, जोड़ों में दर्द, उल्टी, डायरिया हैं।ऐसे लक्षण नजर आएं तो जाँच जरूर कराएँ।

जिला मलेरिया अधिकारी बेदी यादव ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की जनपद स्तरीय एवं ब्लाक स्तरीय रैपिड रेस्पान्स टीम द्वारा निरोधात्मक कार्यवाही के साथ जन-जागरूकता, स्वास्थ्य शिक्षा, सोर्स रिडक्शन,ज्वर पीड़ित मरीजों के रक्त नमूनों की जाँच, क्लोरिन की गोली का वितरण, ब्लीचिंग पाउडर, नालियों में लार्वीसाइडल छिड़काव किया जा रहा है, प्रत्येक ग्राम में नियमित साफ-सफाई, नालियों की सफाई हेतु जिला पंचायत राज अधिकारी मऊ व समस्त खण्ड विकास अधिकारी को भी अवगत कराया गया है। साथ ही ब्लाक स्तरीय एवं जनपद स्तरीय रैपिड रेस्पान्स टीम द्वारा निरन्तर निगरानी की जा रही है, जनपद में किसी भी प्रकार का कोई ज्वर पीड़ित मरीज प्रकाश में आता है तो तत्काल सीएमओ आफिस वेक्टर बार्न में सूचित करें।

एपीडिमियोलॉजिस्ट रविशंकर ओझा ने बताया कि जरुरी नहीं है कि हर वायरल डेंगू हो, लेकिन उससे किसी को डरने की जरूरत नहीँ है। बल्कि कुछ सावधानी जरुरी है। इसकी एलाइजा से कराएं जो जाँच मऊ और आज़मगढ़ के सदर अस्पताल एसआरएल लैब में निःशुल्क है। कोई बाहर की जांच के आधार पर (एलाइजा के टेस्ट) को डेंगू घोषित नहीं करें, जिसने भी डेंगू की कार्ड द्वारा जाँच करायी है, वह भी मऊ या आजमगढ़ में जाकर निःशुल्क एलाइजा जाँच करा कर डेंगू की पुष्टि कर सकता है।

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