बात सेहत की

मऊ में जिला अस्पताल में चिपकी जीभ (टंग टाई) का हुआ सफल आपरेशन

० पोषण पखवाड़ा के दौरान चिपकी जीभ (टंग टाई) रोग से ग्रसित मिली बच्ची, आँगनबाडी कार्यकर्ती ने जिला अस्पताल में कराया सफल आपरेशन

मऊ। जनपद में पोषण पखवाड़ा अभियान के दौरान आँगनबाडी कार्यकर्ता मंजू यादव को ग्राम बरलाई से तीन माह की बच्ची आराध्या मिली। जिसका वजन काफी कम था, जांच करने पर पता चला कि उसकी जीभ चिपकी होने के वजह से कायदे से ब्रेस्ट फीडिंग न कर पाने के कारण वजन कम हो गया था। जिसे जिला चिकित्सालय स्थित एनआरसी के डॉ एमपी सिंह को दिखाया उन्होंने आराध्या को जाँच के उपरांत आपरेशन के लिये ईएनटी विशेषज्ञ डॉ सौरभ को रेफर कर दिया जहां उसका निःशुल्क सफल आपरेशन किया गया। अब वह पूरी तरह से स्वास्थ्य है।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ श्याम नरायन दुबे ने बताया कि टंग टाई अर्थात चिपकी जीभ बच्चों में पाई जाने वाली एक ऐसी स्थिति होती है जो बच्चों की जीभ कार्य को एकदम कम कर देती है। यह समस्या बच्चे में जन्म से ही पाई जाती है और इस स्थिति में जीभ का तंतु (फ्रेनुलम) इतना छोटा होता है कि वह जीभ को मुंह के तले से बांध देता है। जिसकी वजह से वह ज्यादा ऊपर नहीं उठ पाती व इस कारण जीभ अधिक हिल भी नहीं पाती। इस स्थिति के कारण ब्रेस्ट फीडिंग, बोलते और खाना खाते समय बच्चों को बहुत दिक्कत होती है। चिपकी जीभ (टंग टाई) स्थिति का उपचार किया जा सकता है और अगर इसे जल्द से जल्द पहचान लिया जाता है तो इसका इलाज भी जल्दी व आसानी से संभव है। 
आराध्या का आपरेशन करने वाले जिला चिकित्सालय पुरुष के नाक कान गला विशेषज्ञ डॉ सौरभ ने बताया कि टंग टाई की समस्या अधिकतर लड़कों में मिलती है और इसके होने की संभावना का अनुपात लगभग पांच से 10% होता है। तंतु के छोटे होने की वजह से बच्चे को र, ल, ड, ट, त जैसे शब्दों को बोलने में काफी कठिनाई होती है।

परदहा ब्लाक की प्रभारी बाल विकास परियोजना अधिकारी गीता तिवारी ने बताया कि टंग टाई के लक्षणों के आधार पर हमारी आँगनबाडी कार्यकर्ता को पहचानने के लिये निम्न जानकारियों के आधार पर प्रशिक्षित किया जाता है। जिसमें जीभ के नीचे एक मोटा या पतला वर्टिकल स्किन का टुकड़ा दिखाई देना। मुंह खोलने के बाद भी जीभ बाहर न निकाल पाना। जीभ और ऊपर की ओर न लेकर जा पाना। जीभ साइड में न कर पाना। जीभ का आकार असामान्य होना और दिल की या वी या फ्लैट शेप की जीभ दिखना। अगर यह स्थिति और अधिक गंभीर होगी और बच्चे की जीभ में ज्यादा खिंचाव होगा तो वह दूध पीते समय अच्छी पकड़ नहीं बना पाएगा।
दूध पीते बच्चे में लक्षण बार-बार निप्पल को पकड़ना और छोड़ना दूध पीते समय क्लिकिंग साउंड आना। बच्चे का वजन न बढ़ पाना। वजन का कम हो जाना। अधिक जल्दी थक जाना और दूध पीते-पीते ही सो जाना। दूध पिलाते समय निप्पल में दर्द होना। बच्चे को दूध पिला देने के बाद पिंच निप्पल मिलना। कम दूध आना। अगर बच्चा बॉटल से दूध पीता है  बहुत सी हवा को अंदर ले जाना। बहुत जल्दी थक जाना। मुंह के आस-पास दूध को गिरा देना।

आपरेशन के बाद आराध्या की माँ ने बताया कि पूरा परिवार बहुत खुश है। अब हमारी बेटी बिलकुल ठीक हो जायेगी, दूध भी पियेगी और स्वस्थ भी हो जायेगी।

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