पुण्य स्मरण

“काश! श्रद्धा के पुष्प अर्पित करते समय जूते उतार देतीं मायावती”

@ आनन्द कुमार…

० कांशीराम जी की जयंती पर श्रद्धांजलि और एक विनम्र आग्रह

आज बामसेफ, बीएस 4 व बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक Kanshi Ram जी की जयंती है। भले ही वे आज हमारे बीच शारीरिक रूप से उपस्थित नहीं हैं, लेकिन समाज के प्रति उनके द्वारा किए गए कार्य, लोकतंत्र को मजबूत करने का उनका संकल्प और बहुजन समाज सहित सभी वंचित वर्गों के लिए उनका संघर्ष आज भी देश को प्रेरणा देता है। उनके विचार और उनका आंदोलन भारतीय लोकतंत्र की एक महत्वपूर्ण विरासत बन चुके हैं।

यही कारण है कि आज केवल Bahujan Samaj Party ही नहीं, बल्कि Samajwadi Party, Bharatiya Janata Party, Indian National Congress सहित अन्य दलों के लोग भी उन्हें श्रद्धापूर्वक याद कर रहे हैं। लोकतंत्र में राजनीतिक दलों के बीच मतभेद और खींचतान स्वाभाविक है, लेकिन जब विभिन्न विचारधाराओं के लोग भी किसी व्यक्तित्व को सम्मान के साथ याद करें, तो यह उनकी महानता को दर्शाता है।

Mayawati जी, इस अवसर पर आपसे एक छोटी-सी विनम्र शिकायत भी है। जब आप अपने राजनीतिक गुरु, अपने अभिभावक और मार्गदर्शक कांशीराम जी को पुष्प अर्पित करने उनके द्वारा स्थापित आदमकद प्रतिमा के सामने गईं, तो यदि आप जूते उतारकर श्रद्धांजलि देतीं तो शायद और अधिक आत्मीयता और सम्मान का भाव प्रकट होता।

हमें यह बिल्कुल नहीं लगता कि आपके मन में श्रद्धा या सम्मान की कोई कमी है। यह संभव है कि यह केवल एक अनजाने में हुई भूल हो। आमतौर पर लोग किसी भी प्रतिमा या स्मारक पर पुष्प अर्पित करते समय जूते उतारकर श्रद्धा व्यक्त करते हैं, और कांशीराम जी तो लोकतंत्र के एक जिंदादिल महापुरुष थे।

कभी-कभी ऐसा भी लगता है कि आपके आसपास मौजूद लोग आपको सही सलाह देने से हिचकते हैं या शायद वे आपसे अत्यधिक संकोच या भय महसूस करते हैं। लेकिन एक मजबूत और जनप्रिय नेतृत्व के आसपास ऐसे लोग भी होने चाहिए जो सही समय पर सही सुझाव दे सकें।

फिर भी, यह बात पूरी विनम्रता और सम्मान के साथ कही जा रही है। उम्मीद है कि भविष्य में ऐसे अवसरों पर और भी संवेदनशीलता और परंपरा का ध्यान रखा जाएगा।

कांशीराम जी के प्रति देश की श्रद्धा और सम्मान हमेशा बना रहेगा, क्योंकि उन्होंने केवल एक पार्टी नहीं बनाई, बल्कि एक सामाजिक चेतना और आत्मसम्मान का आंदोलन खड़ा किया। आप उनके आदर्शों पर चल रही हैं लेकिन ऐसे महान व्यक्ति के प्रति ऐसी भूल नहीं होने चाहिए ।

 

आज कांशीराम जी की जयंती पर बसपा सुप्रीमो के शब्द उनके सोशल मीडिया पेज से …

बहुजन समाज पार्टी (बी.एस.पी.) के जन्मदाता एवं संस्थापक मान्यवर श्री कांशीराम जी को, आज उनकी जयंती पर मेरे व मेरे नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश भर में उनके अनुयायियों द्वारा शत्-शत् नमन व अपार श्रद्धा-सुमन अर्पित, जिन्होंने परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर की ‘सोच एवं मूवमेन्ट’ को पूरे देश में ज़िन्दा करके व उनके कारवाँ को आगे बढ़ाकर सत्ता की मंज़िल तक पहुँचाने के मिशन हेतु अपना सम्पूर्ण जीवन समर्पित करके लगातार कड़ा संघर्ष किया तथा जाति के आधार पर तोड़े और पछाड़े गये लोगों को ’बहुजन समाज’ की एकता में जोड़ने के उस ऐतिहासिक योगदान की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुये, बी.एस.पी. के ’सामाजिक परिवर्तन व आर्थिक मुक्ति’ मूवमेन्ट को तन, मन, धन से मज़बूत बनाने व पूरी ज़िद के साथ चुनावी सफलता अर्जित करने के संकल्प को दोहराया, जिसके लिए मैं पार्टी प्रमुख के रूप में, सभी लोगों का तहेदिल से आभार, धन्यवाद व शुक्रिया अदा करती हूँ।
साथ ही, यह आह्वान भी है कि ’बहुजन समाज’ के लोग ’बी.एस.पी. मूवमेन्ट से जुड़कर मिशनरी व ईमानदार अम्बेडकरवादी बने’ और अपने वोटों की शक्ति से सत्ता की मास्टर चाबी हासिल करें ताकि बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर द्वारा संविधान में देश के बहुजनों के हित, कल्याण, उत्थान तथा उनकी सुरक्षा व आत्म-सम्मान हेतु प्रदत्त अधिकारों को ज़मीन पर लागू करके वे भी, गुलामी और लाचारी के त्रस्त जीवन से मुक्ति पाकर, रोटी-रोज़ी-युक्त अच्छे दिन वाला ख़ुश एवं ख़ुशहाल जीवन व्यतीत कर सकें, जो कि मान्यवर श्री कांशीराम जी का मिशन व उनका जीवन संदेश भी है। धन्यवाद।

मायावती

 

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