मिसाल-ए-मऊ

मऊ के अभिषेक बने IPS, कुछ माह पहले ही बने थे PCS

( आनन्द कुमार )

मऊ। कहते हैं न मेहनत करो परिणाम की चिंता मत करो। अगर आपके द्वारा सच्चे लगन, ईमानदारी से अपने सपनों को पंख देने के लिए मेहनत किया गया है तो आपको सफलता मिलनी ही मिलनी है। 17 फरवरी 2021 में यूपी पीसीएस वर्ष 2019 के परीक्षा परिणाम में पीसीएस अधिकारी बने मऊ के बेटे अभिषेक सिंह ने शुक्रवार सिविल सेवा परीक्षा 2020 के परीणाम में न सिर्फ सफलता पाकर जिले का मान व परिवार का सम्मान बढ़ाया है बल्कि 240वीं रैंक पाकर आईपीएस बनेगें। उनका सपना अभी भी आईएएस बनने का है। ऐसे होनहार जब अपनी प्रतिभा की बदौलत मां बाप के सपनों को साकार करे और अपनी मंजिल को प्राप्त करें तो क्या कहने। ऐसे मऊ के लाल के इस सफलता पर परिजन, दोस्त मित्र, शुभचिंतक, रिश्तेदारों सहित मऊ के हर शख्स का इन खुशियों के पल में झूम उठना स्वाभाविक है।
मऊ जिले के रतनपुरा कस्बा निवासी सहायक अध्यापक बालमुकुंद सिंह व सहायक अध्यापक श्रीमती उषा सिंह के पुत्र अभिषेक के सात माह के अंदर दोहरी सफलता और पीसीएस से आईपीएस बनने के सफर में सभी गदगद हैं। फरवरी में उनका चयन डिप्टी कलेक्टर के पद पर छठवीं रैंक के साथ हुआ था। वे कौशाम्बी में डिप्टी कलेक्टर के पद पर प्रशिक्षु हैं। 24 सितंबर 2021 को सिविल सर्विस सेवा परीक्षा 2020 के परीणाम में 240 वीं रैंक लाकर आईपीएस बने। अभिषेक कहते हैं मेहनत, लक्ष्य, लगन के कठिन परिश्रम व माता, पिता, गुरूजनों व बड़ों के आशीर्वाद की बदौलत कुछ भी हासिल करना मुमकिन है।
अभिषेक सिंह ने लखनऊ स्थित बाबा बनारसी दास से वर्ष 2014 में बीटेक की डिग्री ली ,और उनका चयन वर्ष 2015 में भारतीय स्टेट बैंक में पीओ के पद पर हो गया। जहां वे वर्ष 2015 से इस पद पर रह कर के पीसीएस की तैयारी कर रहे थे। यद्यपि उन्हें पीओ के पद पर पहली पोस्टिंग महाराष्ट्र के मनमाड में हुआ था और फिर वहां से वे स्थानांतरित होकर औरंगाबाद चले गए। जहां पर रहकर यूपी पीसीएस की तैयारी कर रहे थे। जहां पर उन्हें पीसीएस बनने में सफलता प्राप्त हुई थी और सात माह के अंदर ही आईपीएस बन मऊ का नाम रौशन कर अभिषेक ने इतिहास रचा, या यह कह लिया जाए कि शुक्रवार को मऊ में इतिहास ही रचने का दिन था तभी तो अभिषेक के साथ-साथ विधु शेखर राय ने भी सिविल सेवा परीक्षा में हर बार पहले से बेहत्तर कर तीन बार लगातार इतिहास रचा। जबकि सम्भावना है कि अभिषेक का आईपीएस की जगह पर आईएएस कैडर भी मिल सकता है।

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