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योगी जी, गलती से आपके डाक्टर साहब! चिकित्सा सेवा में भर्ती हो गए हैं उन्हें पुलिस सेवा में भेजिए!

@ आनन्द कुमार…
वाह योगी जी वाह आपके चिकित्सक भी गजब-गजब के हैं। लेकिन क्या गजब के फूर्ती और जोश वाले चिकित्सक की भर्ती किया है आपके स्वास्थ्य विभाग की टीम ने! सच में शनिवार को मऊ जिला अस्पताल के इमरजेंसी में घटित घटना का वीडियो देख कर मजा और रोना दोनों साथ आ गया! क्या गजब का निशाना है आपके चिकित्सक का! प्रसेंट आफ माइंड का प्रयोग तो तारीफ ए काबिल है, पूछिए ही मत! सच में आपके डाक्टर का यह अनोखा कार्यशैली देख कर तो ऐसा लगा कि भर्ती टीम और चिकित्सक की चिकित्सा सेवा दोनों की इच्छा गलत जगह फिट हो गई है! ऐसे चिकित्सक की भर्ती चिकित्सा सेवा में नहीं बल्कि पुलिस सेवा में होनी चाहिए! जहां वह निहत्थे पत्रकारों पर अपनी ताकत का प्रयोग न कर सके बल्कि ऐसे जाबांज डाक्टर (युवा) का प्रयोग (सेवा) अपराध की दुनिया में कोढ़ बने अपराधियों के खिलाफ किया जा सके! तथा ऐसे हिम्मती और ताकतवर लोगों की बदौलत हम अपराध की दुनिया के बादशाहों को नेस्तनाबूद कर सके और योगी के मंशा के अनुरूप कानून का राज स्थापित हो सके!क्योंकि जिस चिकित्सक के अंदर किसी पत्रकार की समाचार कवरेज करते समय मोबाइल छिनने की हिम्मत हो और जब पत्रकारों अपना मोबाइल मांगे तो उसके ऊपर हेलमेट चलाकर मारने का अचूक निशाना हो ऐसे जाबांज मऊ में तैनात चिकित्सक महोदय को जनता का भगवान समझने की भूल शायद बड़ी भूल होगी। क्योंकि इस क्षेत्र में इस तरह का डिप्रेशन वाले व्यक्ति का होना ठीक नहीं है।

यह अलग बात है कि अगर पत्रकार अमित सिंह चौहान के पास डाक्टर साहब का वीडियो नहीं होता तो चिकित्सा एक्ट के सारे कानून में वह ही दोषी नजर आते! खैर डाक्टर भी आपकी है, पुलिस भी आपका और कानून भी आपका और जनता भी आपकी ही है। पत्रकारों का क्या वह तो अपना काम करते हैं, उसमें कुछ अच्छा भी होते तो कुछ बुरा। आपका कानून अगर सही से जांच करके रिपोर्ट सौंपे तो आपकी चिकित्सा सेवा की पोल खुलती नजर आएंगी, अब बड़े साहब लोग आपको किस टाइप का रिपोर्ट सौंपेंगे यह तो वह ही जानें। अगर चिकित्सा मंत्री बृजेश पाठक जी इस मामले को संज्ञान में लेकर उचित कार्रवाई करते हैं तो उन्हें जो तस्वीर दिखाई देगी उसमें सिर्फ धोखा ही धोखा नजर आएगा! तो महोदय पत्रकारों का क्या वह आपको आईना दिखाने का काम तो करते ही रहेंगे अब आपको उसमें अपनी तस्वीर ठीक से न दिखाई दे तो उनका क्या दोष। और रह गई बात न्याय की तो न्याय नहीं देंगे तो जनता तो सब देख रही है उसकी आंखों को कैसे बंद करेंगे। महोदय डाक्टर साहब का गुस्सा और व्यवहार देखकर तो यही लगता है कि उनकी नियुक्ति गलत जगह हो गई है। इन्हें खतरों की जगह पर भेजने की जरूरत है क्योंकि आप महोदय डाक्टर कम खतरों के खिलाड़ी ज्यादा लगते हैं।
अच्छा है कि कुछ माह पहले अस्पतालों का औचक निरीक्षण करने वाले सूबे के चिकित्सा मंत्री बृजेश पाठक जी कभी मऊ नहीं आएं, या कोई बड़ा अधिकारी अस्पतालों का दौरा नहीं किया, नहीं तो वीडियो टाइप का दौरा डाक्टर साहब कर गए तो वर्तमान चिकित्सा मंत्री को अपने पूर्व के कानून मंत्री का पाठ पढ़ाना पड़ता। अब जब अस्पताल के इमरजेंसी में मरीज को समय से डाक्टर साहब के न देखने पर पत्रकार की कवरेज पर मरीज को आला की जगह पत्रकार को हेलमेट का मार मिले तो फिर फिर तो भईया कोई भी हो संभल कर ही जिला अस्पताल जाएगा! नहीं तो कहीं डाक्टर साहब का दिमाग घुम गया तो फिर लेने के देने पड़ जाएंगे! अभी नौजवान डाक्टर साहब ने हेलमेट ही चलाया है, कहीं कैंची, ग्लुकोज़ की शीशे की बोतल, उसे टांगने का स्टैंड, ब्लडप्रेशर नापने का यन्त्र आदि चला दिया तो फिर न तो कोई मंत्र काम करेगा ना कोई तंत्र! क्योंकि चोट डाक्टर साहब को ही देना और इलाज भी वही करेंगे और ऐसे में कहीं गुस्से में इंजेक्शन इधर का उधर घुसा दिया तो फिर भगवान ही मालिक हैं। इतना ही घटना के समय जब डाक्टर साहब ने हेलमेट की कलाबाजी की तो उस समय कई पुलिस के जवान, होमगार्ड, मरीज व तीमारदार भी मौजूद थे।

घटना का वीडियो देखने के लिए लिंक को क्लिक करें।
https://youtube.com/shorts/6TWWNnqzzKQ?si=EnSIkaIECMiOmarE

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