मऊ में बीटीसी 2004 बैच के शिक्षकों का “अनुगूंज” के साथ समागम
आ कि तुझ बिन इस तरह ए दोस्त घबराता हूं मैं।
जैसे हर शय में किसी शय की कमी पाता हूं मैं।।
जिस प्रकार एक पुस्तक ज्ञान का पुंज होता है ठीक उसी प्रकार आपको यदि सच्चा व ज्ञानी मित्र मिल जाए तो वह किसी पुस्तकालय से कम नहीं होता है। मित्रता अनमोल रत्न के समान होती है, जीवन में सच्चा मित्र मिलना सौभाग्य से कम नहीं होता है, वह मनुष्य के सुख को बढ़ा देता है और उसके दुख को बांट लेता है। खून के परिवारिक रिश्ते इंसान सामाजिक परिवेश में निभाता है परंतु दोस्ती का रिश्ता ना जन्म से होता है और ना ही विवाह के बाद होता है, यह रिश्ता अटूट विश्वास और प्रेम से आता है। इंसान एक सामाजिक प्राणी है जिसे बंधन की आस होती है, यह बंधन प्रेम, विश्वास और जिम्मेदारी का होता है। दोस्ती भी एक विश्वास का बंधन है और जो सच्ची दोस्ती होती है वह अटूट बंधन से परिपूर्ण होती है। यही मित्रता 2004 बी टी सी डायट बैच के शिक्षकों मैं देखने को मिली।
मऊ के तिरंगा तिराहे स्थित गृहस्त प्लाज़ा में बीटीसी 2004 बैच के शिक्षकों ने प्रत्येक वर्षों की भांति 12 वीं नियुक्ति दिवस को ‘अनुगूंज’ कार्यक्रम के रूप में हर्षोल्लास के साथ मनाया। इस अवसर पर मिशन चंद्रयान 3 के चित्र से सुसज्जित केक काटा गया तथा उसके आर्बिटर, लैंडर विक्रम और रोवर प्रज्ञान को कार्यक्रम के साथ जोड़ा गया। वार्षिक कार्यक्रम में जिले के बाहर उक्त बैच से नियुक्त शिक्षकों ने भी प्रतिभाग किया। कार्यक्रम में डायट के प्रशिक्षण के अनुभव को तमाम शिक्षकों ने बताया तथा उस समय व्यतीत किए गए पल और आपस में बने मधुर मित्रवत संबंधों को काव्य के माध्यम से, हास्य के माध्यम से, गायन और व्याख्यान के माध्यम से लोगों ने याद किया।
बैच के मेधावी शिक्षकों ने शिक्षण जगत के अनुभवों, नवाचारों उपलब्धियों और चुनौतियों के विषय में भी विस्तार से अपने ज्ञान को आपस में बांटा जिससे कार्यक्रम ने विस्तार लिया और एक शैक्षिक उन्नयन कार्यक्रम का आकार लिया। सर्वप्रथम, सभी लोग गोलाकार आकृति में बैठक व्यवस्था बनाये और डायट के दिनों की प्रार्थना से कार्यक्रम का आरंभ किया तत्पश्चात अंताक्षरी ,म्यूजिकल चेयर तथा व्यक्तिगत साक्षात्कार से कार्यक्रम को ऊंचाइयों पर पहुंचाया। शिक्षकों ने मित्रता के गीत गाए और आजीवन अटूट मित्रवत बने रहने का संकल्प भी लिया।
कार्यक्रम के दौरान बहुत से भावुक क्षण भी आए जिसे लोगों ने शब्दों की तुरपाई से व्यक्त किया और आगे मिलते रहने का वादा भी किया। शिक्षक कल्याण कोष निर्माण, जिसमें किसी भी बैच के शिक्षक पर विपदा की स्थिति में वित्तीय मदद की बात कही गई, बच्चों को उच्च शिक्षा, व्यवसायिक तथा तकनीकि शिक्षा हेतु समूह बनाकर मार्गदर्शन की बात कही गई, जाति उन्मूलन और भेदभाव रहित समाज बनाने का अपने स्तर से प्रयास की बात तथा शिक्षक हित के विरुद्ध शासन प्रशासन तथा अधिकारियों के खिलाफ एकजुटता की बात की गई।
शिक्षकों ने अपने प्रशिक्षकों को भी याद किया। इस अवसर पर डायट की समकालीन प्रशिक्षिका श्रीमती गिरिजा यादव,आजमगढ़ जिला महिला शिक्षिका संघ अध्यक्ष शिखा मौर्य, एआरपी प्रमोद चौहान, शैलेंद्र पांडेय, ओम नारायण सिंह, डॉ प्रदीप राय,आदित्य यादव,अरविंद दूबे, विनोद यादव, राजेश यादव, हेमराज मद्धेशिया, अखिलेश गुप्ता, राम कमल यादव, दीपमाला, रीना चौरसिया, अभिमन्यु सिंह, सुदामा वर्मा सहित कुल 50 शिक्षक, शिक्षिकाएं मौजूद रहीं।




