महिला को जिंदा जलाकर हत्या कर देने के आरोपी को आजीवन कारावास
मऊ। अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम अशोक कुमार ने महिला को जिंदा जलाकर हत्या कर देने के आरोपी को आजीवन कारावास की सजा से दंडित करने का निर्णय बुद्धवार को खुले न्यायालय में सुनाया।
थाना दक्षिणटोला से सम्बंधित इस मामले में मुकदमा वादी शिवनाथ की बहू पुष्पा को अम्बिका साहनी निवासी बैजापुर थाना दक्षिणटोला मऊ ने बच्चो के मामूली विवाद में 30 अक्टूबर 2015 को केरोसिन का तेल डालकर जिंदा जला दिया था। इलाज के दौरान घटना के दिन ही वाराणसी ले जाते समय पीड़िता की मृत्यु हो गयी थी। विवेचना के उपरांत अम्बिका साहनी के विरुद्ध भादवि की धारा 326, 302, 506 में आरोप पत्र प्रस्तुत किया था। विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष की तरफ से अपर जिला शासकीय अधिवक्ता अजय कुमार सिंह ने कुल 9 गवाह प्रस्तुत किया। पत्रावली में उपलब्ध साक्ष्यों व दोनो पक्षो के तर्कों को सुनने के बाद एडीजे ने आरोपी अम्बिका साहनी को हत्या का आरोपी पाया। सजा के बिंदु पर सुनवाई के समय शासकीय अधिवक्ता द्वारा कहा गया कि मृतका पुष्पा साहनी अपने पृथक आवास में अकेली रहती थी और उसका पति नौकरी के सिलसिले में बाहर रहता था। उसके 3 बच्चे कुणाल (10 वर्ष) अपने नानी के पास, उससे छोटी नंदनी (7वर्ष) तथा उसकी गोद मे 2 माह की बेटी चांदनी थी। पंचायत के 5 दिन बाद अभियुक्त द्वारा पीड़िता को उसके घर से 15-20 कदम की दूरी पर कच्ची सड़क पर मिट्टी का तेल डालकर उसे जिंदा जलाया गया, जिसके नाते उसकी मृत्यु हो गयी।
एडीजे ने अपने निर्णय में लिखा कि अभियुक्त द्वारा वादी मुकदमा की बहू मृतका पुष्पा साहनी के ऊपर मिट्टी का तेल डालकर घर के बाहर बीच रास्ते पर जलाकर हत्या कारित की गई है। अभियुक्त के इस कृत्य से जहां मृतका के तीनों बच्चे सदैव के लिए मातृछाया से वंचित व अभिशप्त हो गए, वहीं दूसरी तरफ अभियुक्त का यह कृत्य बेहद विभक्त व अमानवीय है और मानवीय संवेदनाओं को तार-तार करता है। अभियुक्त द्वारा किया गया यह आपराधिक कृत्य अत्यंत ही जघन्य अपराध एवं गंभीर प्रकृति की श्रेणी में आता है। अपने आदेश में एडीजे ने अंबिका साहनी को भादवि की धारा 302 में आजीवन कारावास की सजा व ₹40000 के अर्थदंड से दंडित करने का निर्णय सुनाया और कहा कि अर्थदंड अदा न करने पर अभियुक्त को 6 माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भी भुगतना होगा।इसके अलावा भादवि की धारा 506 में अभियुक्त को 1 वर्ष की सजा से दंडित करने का निर्णय दिया। उन्होंने कहा कि सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। यह भी कहा कि अअर्थदंड के ₹40000 में से ₹35000 की धनराशि मृतका के पति को प्रतिकर के रूप में देय होगी।

