कवि सम्मेलन : मेरी कविता शब्दों की श्रृंगार नहीं है,मेरी कविता मीठी रसधार नहीं है
गोंठा/मऊ। साहित्य परिषद गोंंठा के तत्वावधान में शनिवार को आयोजित आल इंडिया कवि सम्मेलन व मुशायरे में जहाँ पुरी रात देश के नामचीन कवियों ने अपने हुनर का लोहा मनवा दिया वही हास्य गीत गजल ओज की कविता सुनाकर कवियों ने खुब वाहवाही लुटी पुरी कवियों व शायरो की महफ़िल में श्रोताओं ने खुव आनन्द उठाया कार्यक्रम का शुभारम्भ मां सरस्वती के चित्र पर मुख्य अतिथि प्रभारी जिलाधिकारी आर पी पाल व ब्लॉग प्रमुख प्रदीप कुमार राय राजू राय अविनाश जायसवाल व शेखर पाण्डेय के द्वारा माल्यार्पण व दीप प्रज्वलन के बाद अतिथियों का परिचय व अगवस्त्रम प्रतिक चिन्ह देने के बाद कवि सम्मेलन व मुशायरे का शुभारम्भ हुआ।
कवि सम्मेलन के मशहूर संचालक रामकिशोर तिवारी ने सरस्वती बंन्दना के लिये जैसे ही ओज की प्रख्यात कवयित्री लखनऊ की कविता तिवारी को आवाज दी पुरा पंडाल तालियों की गड़गडाहट से उनका स्वागत किया मां शारदे का आह्वान करती हुई पढ़ा कि ‘सारी धरा तुम्हारी ही गीत गा रही है,ऐसा लगा कि मधुरिम बीणा बजा रही है ‘आ जाओ मंच पर भी आसन यही लगा लो, देवी सरस्वती माँ बेटी बुला रही हैं, वन्दना के स्वर की झंकार इतनी प्रबल थी की श्रोता भी हाथ जोड़कर शारदे को नमन करने लगे फिर क्या था अब मंच को शायर सलमान घोषवी ने मां के मर्म को छुने वाली बेबस मजदूर की कविता पढ़ी कि ‘ये समंदर से उतरकर हम भी गौहर लेके आयेंगे ‘तेरी नजरों ने जो देखा है वो मंजर लेके आयेंगे,आज मजदूरी पे निकला हूँ घर से सोच के अपने,कमाई से हम अपनी माँ के चादर लेके आयेंगे ‘ कलाम पेश कर खुब वाहवाही लुटी।
इसके बाद हास्य व्यंग्य के खजाने लेकर बाराबंकी से पधारे विकास बऊखल ने पढ़ा कि ‘किसी खंजर से तलवार से जोड़ा जाये,सारी दुनिया को चलो प्यार से जोड़ा जाये,ये किसी शख्स से दोबारा न मिलने पाये,प्यार के रोग को आधार से जोड़ा जाये ‘सुनाकर खुब वाहवाही लूटी वही हास्य कवि ने सबको हंसा हंसा कर लोट पोट कर दिया।
राजस्थान से पधारे राष्ट्रीय कवि योगेन्द्र शर्मा की जैसे ही संचालक ने मंच पर उन्हें काब्य पाठ के लिये आमंत्रित किया पुरा सदन ने उनका तालियों से इस्तकबाल किया माईक पकड़ते कहा कि “मेरी कविता शब्दों की श्रृंगार नहीं है,मेरी कविता मीठी रसधार नहीं है,आगे पढ़ा कि ‘अगर सियासी रंग न होता संविधान की धरती पर,तो आतंकी घटनाओं को कोई नादान नही करता,और सही वक़्त पर सरे आम अफ़जल को फांसी दी होती,तो मुम्बई में घनघोर धमाके वो शैतान नहीं करता ‘ कवि के तेवर देख श्रोताओं में भी राष्ट्र भक्ति हिलोरे लेने लगी जहाँ पुरा पंडाल तालियों की गडगडाहट से गुंज रहा था। वहीं नेताओं को भी देश भक्ति याद दिलाते हुए पढ़ा कि ‘संत विवेकानंद हमारी धर्म ध्वजा फहराता था’ तब जाकर बलिदानी भारत धर्म ध्वजा फहराता था।
फिर ओज से श्रृंगार की तरफ संचालक ने मोड़ते हुए गाजीपुर से पधारी कवयित्री रश्मि शाक्या को आवाज दी माइक पार आते ही प्रेम के समर्पण भाव पर गीत कि ‘चमन में खिल उठे हैं फुल तुमने मुस्कुराया क्या,कहीं तुमने प्रणय का गीत कोई गुनगुनाया क्या,तुम्हारे एक वादे पे प्रतिक्षा रत अभी तक हूँ,किसी ने प्यार में इतना किसी को आजमाया क्या,सुनाकर सबके दिलों में उतर गयीं फिर मंच अपनी उचाईयों को छुता हुआ बम्बई लाफ्टर चैम्प के हास्य रसावतार अशोक सुन्दरानी ने तो धमाका ही कर दिया श्रोताओं को अपने हास्य व्यंग्य के माध्यम से हंसा हंसा कर उनके अतडियो को उलट पलट कर रख दिया पढ़ा कि ‘फिर राष्ट्र भक्ति में सबको रंगते हुए ओवैसी पर व्यंग्य कसते हुए पढ़ा कि ‘जो लोग मनहुस होते है उनकी जिन्दगी में कोई तराना नहीं होता, भारत माँ की जय वही लोग नहीं बोलते जिनके खुद के मां बाप का ठिकाना नहीं होता,सुनाकर आज की राजनीति पर भी चोट किया वही जूते की कविता काफी सराही गयी। फ
देश की प्रख्यात कवयित्री कविता तिवारी को संचालक ने आवाज दी कविता तिवारी ने आज की भ्रष्ट राजनित व व्यवस्था पर कराया प्रहार करते हुए पढ़ा कि “अगर माटी के पुतले देह में इमान जिन्दा है’तभी इस देश की समृद्धि का इमान जिन्दा है,ना भाषण से हैं उम्मीदें ना वादों पर भरोसा है शहीदों की बदौलत मेरा हिन्दुस्तान जिन्दा है,सुनाकर श्रोताओं का तालियाँ बजाने को मजबूर कर दिया वहीं ओज की महान कवित्री को सुनने कई जनपदों से श्रोता आये थे।
आजमगढ़ से पधारे मैकस आज़मी ने पढ़ा कि ‘जख्म दिल के जो भर गये होते,हम तो बे मौत मर गये होते,सुनाकर श्रोताओं को झुमने पर मजबूर कर दिया फिर संचालक रामकिशोर तिवारी ने चन्द्रशेखर आज़ाद पर कविता सुनाया कि ‘यज्ञ यहीं पर पुर्ण हुआ युग युग तक गाये बसुन्धरा ‘वह नर कुन्दव बलिदानी था ,आजाद जिया आजाद मरा,सुनाकर देश के शहीदों को नमन किया वही बीरेन्द्र तिवारी बीराट ने भी काव्य पाठ पढ़ा। पुरी श्रोताओं ने कवि सम्मेलन व मुशायरे का आनन्द उठाया कार्यक्रम के संयोजक बीरेन्द्र उपाध्याय ने सबके प्रति आभार जताया।

