आईसीएआर-एनबीएआईएम मऊ ने आयोजित किया कृषि क्षेत्र दिवस
o किसानों को मृदा स्वास्थ्य एवं जैव उर्वरकों के प्रति किया जागरूक
मऊ। आईसीएआर-राष्ट्रीय कृषि उपयोगी सूक्ष्मजीव ब्यूरो (एनबीएआईएम), मऊ द्वारा “उर्वरकों के संतुलित उपयोग एवं मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन” विषय पर एक दिवसीय कृषि क्षेत्र दिवस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से होने वाले दुष्प्रभाव तथा जैव उर्वरकों के लाभों के प्रति जागरूक करना था।
कार्यक्रम के तहत ओन्हाईच, अलीपुर एवं बागली-पिजारा क्षेत्र के गांवों में वैज्ञानिकों एवं कर्मचारियों की 10 टीमों ने घर-घर जाकर किसानों से संवाद स्थापित किया। इस दौरान किसानों को टिकाऊ एवं पर्यावरण-अनुकूल कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
वैज्ञानिकों ने बताया कि रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग से मृदा की उर्वरता और गुणवत्ता में गिरावट आ रही है, साथ ही पर्यावरण, भूजल एवं मानव स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। ऐसे में जैव उर्वरकों और जैविक कृषि तकनीकों का उपयोग समय की आवश्यकता है।
कार्यक्रम में किसानों को जैव उर्वरकों की उपयोगिता, प्रयोग विधि तथा बीज उपचार, जड़ उपचार एवं भूमि उपचार की वैज्ञानिक तकनीकों की जानकारी दी गई। वैज्ञानिकों ने बताया कि जैव उर्वरक लाभकारी सूक्ष्मजीवों पर आधारित होते हैं, जो पौधों को आवश्यक पोषक तत्व उपलब्ध कराने, नाइट्रोजन स्थिरीकरण एवं फास्फोरस को घुलनशील बनाने में सहायक होते हैं।
किसानों ने वैज्ञानिकों के साथ सक्रिय सहभागिता करते हुए मृदा उर्वरता, फसल पोषण एवं उत्पादन बढ़ाने से संबंधित समस्याओं और जिज्ञासाओं पर चर्चा की। वैज्ञानिकों द्वारा किसानों के प्रश्नों का सरल एवं व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत किया गया।
संस्थान के वैज्ञानिकों ने कहा कि आईसीएआर-एनबीएआईएम द्वारा विकसित जैव उर्वरक उत्पादन लागत कम करने के साथ पर्यावरण संरक्षण एवं टिकाऊ कृषि विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। किसानों से अपील की गई कि वे मृदा परीक्षण के अनुसार ही रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग करें तथा जैव उर्वरकों को कृषि प्रणाली का अभिन्न हिस्सा बनाएं।
यह कार्यक्रम निदेशक आलोक कुमार श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ. हर्ष वर्धन सिंह, डॉ. वी. मागेश्वरन, डॉ. उदय भान सिंह, डॉ. हिल्लोल चकदार, डॉ. प्रमोद कुमार साहू, डॉ. दीपक, डॉ. नाज़िया मंजर, डॉ. अभिजीत शंकर कश्यप, डॉ. ज्योत्सना तिलगम, डॉ. शोभित थापा, डॉ. ज्योति प्रकाश सिंह, डॉ. कृष्णामूर्ति, रजनीश मीणा, अभय सिंह, सिद्धार्थ अरोड़ा, रेहान खान सहित ब्यूरो के वैज्ञानिकों, कर्मचारियों एवं शोध अध्येताओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा।






