कविता : “राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और बाबा प्रेमानंद”
@ मनजीत सोनी…
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू
राष्ट्रपति नहीं थीं
जब वे पीले कपड़ों में लिपटे हुए
प्रेमानंद बाबा से मिली!
—
सच पूछिए तो
मुझे उस नए भारत से इतना मतलब नहीं
जो घर में घुसता है
घुसकर मारता है
मैं तो
उस नए भारत का दीवाना हूँ
जहाँ कोई बूढी सांवली विनम्र सर्वोच्च सत्ताधीश
किसी किडनी फेल बाबा के आगे झुककर
अपनी शक्ति को सरेंडर कर देती है!
—
आज समझा हूँ
कि प्राइवेट जेट में सवार होकर
रामकथा बांचने वाले “पेड” कथावाचकों के युग में
कोई ऐसा भी है
जो शपथ खा लेता है
कि वृन्दावन से बाहर नहीं जाएगा –
और वह शपथ
इतनी बड़ी हो जाती है
कि दौड़ी चली आती है दिल्ली
उसके दो मिनट के दर्शन के लिए!
—
कितने बदनाम थे हमारे संत
कुछ तो कर्मों से थे
कुछ जानबूझकर कर दिए गए थे
उन्हीं संतों की भीड़ में
कोई ऐसा महर्षि भी है
जिसकी सीसीटीवी फुटेज लीक होने का कोई डर नहीं
कोई डर नहीं
कि पुलिस उसे पकड़कर
जोधपुर जेल में डाल देगी
या दिल्ली की तिहाड़ जेल में
कोई चिंता ही नहीं
कि उसे पे रोल पर छोड़ा जाएगा या ज़मानत पर
अहा!
पीले कपड़ों में लिपटे हुए
ओ साक्षात् श्रीमदभागवत जैसे तुम
हम काजल की कोठरी में रहने वाले सामान्य मनुष्य
तुम्हें प्रणाम करते हैं बाबा!
—
कितने उच्चारण दोष है
बाबा प्रेमानंद की भाषा में
वे “स” को “श”
और “श” को “स” बोलते हैं
लेकिन वे कभी नहीं बोलते
सफ़ेद को काला
काले को सफ़ेद!
कितनी सच्ची जीभ है
कि जब बोलती है
तो कड़वी बात मीठी बात में बदल जाती है
और मीठी बात मिश्री की डली की तरह दूध में घुल जाती है!
—
नहीं चाहिए
ऐसा सेक्युलर भारत
जो धर्म के नाम मात्र से बिलबिला उठे
जो इतना कायर हो
कि किसी सोमनाथ के टूटे हुए मंदिर की चौखट पर
सफ़ेद टोपी के बोझ से लदा हुआ
अपना सर न झुका सके
यही भारत चाहिए हमें
जो सब कुछ छोड़ चुके किसी फ़क़ीर के आगे
दंडवत झुक जाए
जो संविधान को अलग पलड़े में रखे
जो गीता को रखे अलग पलड़े में
मेरी हार्दिक इच्छा है
कि बाबा प्रेमानंद की तर्ज़ पर
ऐसे मुस्लिम फ़क़ीर भी हों
जो जिहादियों को
“अल्लाह” का नाम जप करने के लिए कहें
हिन्दू हों या मुस्लिम
सब झुकें ऐसे फ़क़ीर के आगे
और लश्कर ए तैयबा
धमकी-पर-धमकी देता रहे :
कि हम जान से मार देंगे ऐसे काफ़िर हिंदुस्तानी मुसलमान को!
—
आएगा
वह दिन भी आएगा
यह दुनिया ज़्यादा दिन बीमार नहीं रह सकती
यह सत्तर अस्सी बरस के
ट्रम्प
नेतान्याहु
खामेनेई
यह सब मरेंगे बारी बारी
दौड़ा दौड़ा आएगा
पूरा अमेरिका और इज़रायल और ईरान और रूस और युक्रेन
किसी प्रेमानंद बाबा की शरण में
आएगा
वह दिन भी आएगा
यह दुनिया ज़्यादा दिन पागलों के हाथों में नहीं रहेगी!
—
बाबा प्रेमानंद!
ओ पीले कपड़ों वाले बाबा प्रेमानंद!
आपके “राधा”नाम की महिमा से
उन बमों बंदूकों तोपों मिसाइलों के प्राण निकल जाएं
जो छोटे छोटे बच्चों को
माँओं का दूध पीने की उम्र में
काले बारूद का “सैरेलक” चटा रहे हैं..
—
बाबा प्रेमानंद!
द्रौपदी मुर्मू
उस दिन
अपने कान्हा की गोपी बन गई थीं
आप बन गए थे
कृष्ण के संदेशवाहक उद्धव
और
कृष्ण
देख रहे थे सब कुछ
परदे के पीछे से
मुस्कुरा रहे थे मन-ही-मन!
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लेखक Manmeet Soni Writes चुरू राजस्थान के रहने वाले हैं

