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गाजरघास उन्मूलन जागरूकता सप्ताह का हुआ समापन

मऊ। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के कुशमौर स्थित राष्ट्रीय बीज विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान परिसर में निदेशक डॉ संजय कुमार के नेतृत्व में गाजरघास उन्मूलन सप्ताह का शुक्रवार को समापन किया गया। इस अवसर पर वैज्ञानिकों ने संस्थान परिसर में तथा आस पास के गांवों में जाकर नागरिकों को गाजरघास दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक किया और बताया कि गाजरघास न केवल फसलों की पैदावार को प्रभावित करती है, बल्कि मानव और पशुओं के स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक है। इसके पराग कण से एलर्जी, सांस लेने में परेशानी तथा त्वचा संबंधी रोग हो सकते हैं। 16 से 22 अगस्त 2025 तक चले इस कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों, किसानों और आम नागरिकों को गाजरघास की पहचान करने और उसे नष्ट करने के सरल उपायों की जानकारी दी गई। कार्यक्रम के समन्वयक वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ अजय कुमार ने संस्थान के वैज्ञानिकों व कर्मचारियों के साथ मिलकर यह सुनिश्चित किया कि परिसर तथा आस पास का क्षेत्र गाजरघास मुक्त हो। संस्थान के वैज्ञानिकों ने सामूहिक प्रयास पर ज़ोर देते हुए कहा कि गाजरघास को उखाड़कर गड्ढों में डालकर मिट्टी से ढकना या जैविक खाद के रूप में उपयोग करना सबसे कारगर तरीका है। निदेशक डॉ संजय कुमार ने नागरिकों से अपील की कि वे अपने आसपास गाजरघास की बढ़वार रोकने में सक्रिय भूमिका निभाएं और दूसरों को भी इसके खतरों के बारे में जागरूक करें।

 

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