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अहिल्याबाई धर्म, न्याय और राष्ट्रधर्म की थी सजीव स्वरूप : सूरज

मऊ पालिका कम्युनिटी हाल में देवी अहिल्याबाई होल्कर की त्रिशताब्दी जयंती स्मृति अभियान पर विधानसभा पंचायत प्रतिनिधि सम्मेलन का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि तथा वक्ता भाजपा लालगंज के पूर्व जिलाध्यक्ष सूरज श्रीवास्तव ने अहिल्याबाई को धर्म, न्याय और राष्ट्रधर्म का सजीव स्वरूप बताया।
उन्होंने बताया कि अहिल्याबाई का जन्म महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के चांडी गांव में हुआ। विवाह के बाद वह मालवा राज्य की बहू बनीं और बाद में महारानी।

उनका जीवन चुनौतियों से भरा रहा। पति खंडेराव की युद्ध में मृत्यु हुई। फिर ससुर मल्हाराव का निधन हुआ। इकलौते पुत्र माले राव की भी असामयिक मृत्यु हो गई। 11 दिसंबर 1767 को उन्हें राज्याभिषेक कर सिंहासन सौंपा गया।
अहिल्याबाई ने विदेशी आक्रमणों के दौर में काशी से रामेश्वरम तक अनेक तीर्थस्थलों का जीर्णोद्धार कराया। उन्होंने देशभर में मंदिर, धर्मशालाएं और घाट बनवाए। काशी, गया, सोमनाथ, द्वारिका और रामेश्वरम में उनके कार्य विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं।

भाजपा जिलाध्यक्ष रामाश्रय मौर्य ने कहा कि पुण्यश्लोक अहिल्याबाई कुशल प्रशासक थीं। स्वयं लगान वसूली, न्याय और प्रजा की समस्याओं का समाधान करती थीं। राजकोष को जनता का धन मानती थीं। सैनिक रणनीति में भी निपुण थीं। उनकी प्रशासनिक दक्षता और दूरदर्शिता ने राज्य को समृद्धि की ओर अग्रसर किया।

मऊ सदर विधानसभा के पूर्व प्रत्याशी अशोक सिंह ने अहिल्याबाई होलकर को देवी के समान पूजनीय बताते हुए उनके जीवन से सिख लेने की बात कही।

कार्यक्रम के संयोजक यशपाल सिंह रहे तथा संचालन आनंद प्रताप सिंह ने किया।

इस अवसर पर ब्लाकप्रमुख अशोक कुमार गनेश सिंह संजय पांडेय आनंद रैकवार संजीव जायसवाल संगीता द्विवेदी कृष्णकांत राय अंजनी सिंह अवधेश सोनकर प्रतीक जायसवाल सुनील यादव ज्योति सिंह पूजा राय प्रीतुलता पांडेय समेत सैकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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