पुरुष रोते नही है, पिघलते ज्वार भाटे से, उफनते भावनाओं को, हलाहल पी जाते है

@ मान बहादुर सिंह “मानु”…
पुरुष रोते नही है
पिघलते ज्वार भाटे से
उफनते भावनाओं को
हलाहल पी जाते है
शंकर सा _
पुरुष रोते नही है……
चलते है तनकर –^-^
की कोई देख ना ले
लड़खड़ाना उनका
पुरूष रोते नही है …..
संभालना दूसरे को
शायद नियति उनकी !
सोते भी नही थक कर
करते है बाते ख़ुदी से
परेशान है अरसों से
अपनो के कल के लिए,
पुरूष रोते नही है…….
विदा होती बेटी से
मिलते नही देर तक
बन जाते है पत्थर …
फट ना पड़े सैलाब से
बस ! पुरुष रोते नही है . . ///
पितृ दिवस की शुभकामना💐🙏💐

