रचनाकार

“पथ के पत्थर”

@ मीनाक्षी गर्ग

मीनाक्षी गर्ग

पथ के पत्थर ही तो होते हैं,
जो हमे संभल कर चलना सिखाते हैं,
कोमल मिट्टी पर तो अक्सर,
पैर धंस ही जाते हैं ।

पथ के पत्थर ही होते हैं,
जो हमे हर समय सचेत रहना सिखाते हैं,
पता नही कब कौन सा नुकीला कंकड चुभ जाये,
सचेतता कितनी जरूरी होती है ।

पथ के पत्थर ही होते हैं,
जो हमे जीवन मे मजबूत बनाते है,
अक्सर चुभकर, ये हमें,
संघर्षो से लड़ना सिखाते हैं ।

पथ के पत्थर ही तो होते हैं,
जो एक के बाद एक रास्ते में,
बिछकर भी आगे का रास्ता दिखाते हैं,
मार्गदर्शक बन हमारा हौसला बढाते हैं । 06/06/2022

One thought on ““पथ के पत्थर”

  • डाक्टर महिमा सिंह

    बहुत खूब लिखा है आपने बधाई हो आपको इतनी सुंदर अभिव्यक्ति के लिए हृदय से वंदन 🙏🙏🙏

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